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Monday, October 23, 2017

AJATSHATRU FORT


अजातशत्रु का किला 

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राजगीर रेलवे स्टेशन से बाहर निकलकर मैं राजगीर शहर में आया, सुबह सुबह ही पैदल अजातशत्रु के किले तक पहुंच गया । यह किला, गया - मोकामा राजमार्ग 82 पर स्थित है। यह किला पूर्ण रूप से ध्वस्त हो चुका है अब केवल इसकी बाहरी दीवारों के अवशेष ही शेष हैं, किले के अंदर जहाँ किसी ज़माने में राज महल हुआ करते थे उस जगह अब केवल वर्तमान में मैदान ही बचे हैं किसी भी राजमहल के अवशेष अब यहाँ देखने को नहीं मिलते हैं। किले के रूप में इसकी चारदीवारी ही शेष बची है जो इसके किसी समय में विशालकाय होने का संकेत देती है।


Sunday, October 22, 2017

ROHTASGARH ROAD




रोहतासगढ़ की तरफ एक यात्रा 


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     सुबह दस बजे के करीब मैं वापस सासाराम स्टेशन आ गया, अब मुझे रोहतास के किले को देखने जाना था, रोहतास जाने के लिए डेहरी होकर जाना पड़ता है और डेहरी जाने के लिए ट्रेन ही सर्वोत्तम है जो दस मिनट में सासाराम से डेहरी पहुंचा देती है। स्टेशन पर दीक्षाभूमि एक्सप्रेस आ रही थी जो अगले स्टेशन देहरी जाने के लिए तैयार थी। कुछ ही देर बाद मैं डेहरी स्टेशन  पर था। यहाँ स्टेशन के बाहर लगे बोर्ड पर रोहतास के किले को देखकर मन और भी रोमांचित हो उठा।

Saturday, July 16, 2016

WAIR FORT


 DATE :- 16 JULY 2016

ऊषा मंदिर और वैर फोर्ट 

यात्रा एक साल पुरानी है परन्तु पब्लिश होने में एक साल लग गई, इसका एक अहम् कारण था इस यात्रा के फोटोग्राफ का गुम हो जाना परन्तु भला हो फेसबुक वालों का जिन्होंने मूमेंट एप्प  बनाया और उसी से मुझे मेरी एक साल पुरानी राजस्थान की मानसूनी यात्रा के फोटो प्राप्त हो सके। यह यात्रा मैंने अपनी बाइक से बरसात में अकेले ही की थी। मैं मथुरा से भरतपुर पहुंचा जहाँ पहली बार मैंने केवलादेव घाना पक्षी विहार देखा परन्तु केवल बाहर से ही क्योंकि इसबार मेरा लक्ष्य कुछ और ही था और मुझे हर हाल में अपनी मंजिल तक पहुंचना ही था , मेरे पास केवल आज का ही समय था शाम तक मुझे मथुरा वापस भी लौटना था।

Friday, September 6, 2013

AJMER - 2013

अजमेर दर्शन और तारागढ़ किला 


      एक अरसा बीत चुका था बाबा से मिले,  तो सोचा क्यों न उनके दर पर इस बार हाजिरी लगा दी जाय । बस फिर क्या था, खजुराहो एक्सप्रेस में आरक्षण करवाया और निकल लिए अजमेर की ओर। मैं रात में ही अजमेर पहुँच गया, और वहां से फिर दरगाह। अभी बाबा के दरबाजे खुले नहीं थे, मेरी तरह बाबा के और भी बच्चे उनसे मिलने आये हुए थे जो उनके दरबाजे खुलने का इंतज़ार कर रहे थे, इत्तफाक से आज ईद भी थी। दरगाह का नज़ारा आज देखने लायक था ।

Monday, July 29, 2013

SHYONPUR FORT




श्योंपुर क़िला 


       इस गर्मी के माह में भी मुझे बरसात की वजह से काफी ठण्ड का सामना करना पड़ा । श्योपुर स्टेशन से बाहर निकलकर मैंने और दीपक ने एक सिगड़ी के किनारे बैठकर चाय पी । यह काफी अच्छी और मसालेदार चाय थी जिसकी कीमत थी मात्र पाँच रुपये । स्टेशन के ही ठीक सामने एक सड़क जाती है, यह सड़क कुन्नु राष्ट्रीय पार्क की ओर जाती है जो यहाँ से अभी काफी दूर था । समयाभाव के कारण हम वहाँ तक नहीं जा सकते थे । फिर भी हमने एक ऑटो वाले को रोककर पूछा - हाँ भाई यहाँ देखने को क्या है ? वो हमारी बात सुनकर थोडा अचरज में पड़ गया और बोला कि आप श्योपुर घूमने आये हो ? हमने कहा कि हाँ । वो हमारी बात सुनकर काफी खुश हुआ और बोला कि काश आपकी तरह मुझे ऐसे ही रोज पर्यटक मिले तो हमारे साथ साथ इस जिले ( श्योपुर ) का भी नाम दुनिया में मशहूर हो जाए । 

Friday, June 21, 2013

KANGRA FORT




काँगड़ा का किला

   मंदिर के ठीक सामने से एक रास्ता काँगड़ा के किले के लिए भी जाता है , यहाँ से किला तीन किमी दूर है । मैं, कुमार , बाबा और मंजू चल दिए काँगड़ा के किले को देखने के लिए , शुरुआत में रास्ता चढ़ाई भरा है फिर बाद में एक सड़क आती है जो सीधे पुराने काँगड़ा की ओर गई है और वही पर है काँगड़ा का किला , रास्ता बिलकुल सुनसान था , रास्ते में हमें एकाध गाडी देखने को मिली और एक या दो लोग जिनसे हमने किले की दूरी भी पूछी । मैं चलता ही जा रहा था, वाकी तीनो मेरे काफी पीछे ही रह गए थे , मेरा तेज चलने का कारण था जल्दी वापद भी लौटना, हमें आज ही ज्वालादेवी के लिए भी निकलना था ।