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Thursday, June 28, 2018

KATHGODAM RAILWAY STATION



काठगोदाम रेलवे स्टेशन पर एक रात 


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     नौकुचियाताल के बाद अब हमने घर वापस लौटने की तैयारी शुरू कर ली थी, मैं घर पर माँ को बताकर नहीं आया था कि मैं नैनीताल बाइक से ही जा रहा हूँ, इस यात्रा के दौरान मैं उनसे यही कहता रहा कि मैं ट्रेन से ही आया हूँ हालाँकि मैं यहाँ से और आगे की यात्रायें भी कर सकता था परन्तु अब मुझसे अपनी माँ से सच नहीं छिपाया जा रहा था और मैं इससे अधिक उनसे झूठ भी नहीं बोल सकता था। अब मेरे मन और दिल ने मुझे धिक्कारना शुरू कर दिया था इसीलिए मैंने अब वापसी की राह ही चुनी। मैं शीघ्र से शीघ्र घर लौट जाना चाहता था इसलिए नौकुचिया के बाद मेरी बाइक का रुख अब घर की तरफ हो चला था। 

      शाम करीब ही थी, थोड़ी देर में सूरज भी ढलने ही वाला था और हम अभी भी जमीन से बहुत ऊँचाई पर थे, मैं अँधेरा होने से पहले ही इन पहाड़ों से नीचे उतरजाना चाहता था इसलिए बाकी के सभी तालों को छोड़कर मैं काठगोदाम की तरफ रवाना हो गया जो कुमाँयू का प्रवेश द्धार था। मैं वापस भीमताल पहुंचा और यहाँ से मैंने नीचे की तरफ उतरना शुरू कर दिया, यह रास्ता देखने में अत्यंत ही खतरनाक था परन्तु शानदार भी था। गहरी घाटियों के बीच मेरी बाइक धीरे धीरे नीचे की तरफ उतर रही थी और मुझे यही लग रहा था कि बस थोड़ी देर में मैं काठगोदाम पहुँच जाऊँगा, परन्तु शायद मैं गलत था। काठगोदाम नीचे जरूर था किन्तु इतना भी पास नहीं था जितना मैं सोचता आ रहा था।  

     रास्ते में पहाड़ों पर मक्का की खेती भी एक शानदार नजारा थी, यहाँ मैंने कुछदेर रुककर गर्म गर्म भुटिया कल्पना को खिलाई और बारिश के रुकने का इंतज़ार किया। पहाड़ी बरसात का कोई भरोशा नहीं होता कभी भी शुरू हो जाती है कभी भी बंद। अँधेरा होने तक मैं काठगोदाम पहुँच चुका था, मैं पहली बार काठगोदाम आया था और आते ही तेज बारिश ने हमारा जोरदार स्वागत किया। एक बड़े पेड़ के नीचे हमने स्वयं को भीगने से बचाया। माँ से किये वादे के अनुसार मुझे यहाँ भी रेलवे का ही सहारा लेना पड़ा जो मैं इस यात्रा में शुरू से लेता ही आ रहा था। हम सबसे पहले रेलवे स्टेशन पहुंचे, यह पूर्वोत्तर रेलवे का आखिरी स्टेशन है और काफी शानदार बना हुआ है। बाइक बाहर खडी कर हम प्लेटफार्म पर पहुंचे और यहाँ अपना स्थान जमाकर कुछ देर मोबाइल फोन को चार्ज किया। 

     मैं कल्पना के लिए बाहर से एक होटल वाले से खाना पैक कराकर लाया, वो होटल वाला भी ब्रजभाषा बोल रहा था और उसका स्टाफ भी। मुझे यह सुनकर बड़ा आश्चर्य हुआ कि कुमांयूनी प्रदेश में मेरी ब्रजभाषा .. जो शायद कई दिन बाद मैंने सुनी थी, मैंने उस होटल वाले से पुछा तो उसने बताया कि वो फ़िरोज़ाबाद का रहने वाला है और इस होटल के मालिक भी फ़िरोज़ाबाद के ही हैं। जब उसे पता चला कि मैं मथुरा से यहाँ बाइक से आया हूँ तो वह बड़ा चकित हुआ और खुश भी इसलिए उसने मुझे खाना भी फिरउसी रेट से दिया जिस रेट से ब्रज में मुझे मिलना चाहिए था । मैं खाना लेकर स्टेशन पहुंचा, रानीखेत एक्सप्रेस चलने के लिए तैयार खड़ी हुई थी इसके बाद बाघ एक्सप्रेस का नंबर था। 

     बाघ एक्सप्रेस के चले जाने के बाद स्टेशन एक दम खाली हो गया। अब प्लेटफॉर्म पर हम और रेलवे के कुछ कर्मचारी ही बचे थे। माँ के रेलवे पास के जरिये मैंने वेटिंग रूम में ही अपना बिस्तर लगाया और कल्पना को सुला दिया। अब मुझे बाइक का भी कुछ इंतज़ाम करना था, यहाँ पार्किंग केवल दिन में ही लगती है रात के समय वहां कोई नहीं होता, इसलिए मैंने अपनी बाइक को प्लेटफॉर्म पर ही खड़ा कर दिया और आराम से सो गया। 

काठगोदाम की तरफ लौटने में पहाड़ 


काठगोदाम की तरफ 

कुमाँयू 


काठगोदाम में एक चौराहा 

बरसात के रुकने तक इसी पेड़ के नीचे हम रुके रहे 


रात्रि के समय काठगोदाम स्टेशन का एक दृशय 

काठगोदाम रेलवे स्टेशन 

काठगोदाम पर रानीखेत 



   

अगली यात्रा - मथुरा की तरफ वापसी 

BHIMTAL



भीमताल और नौकुचियाताल


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    भुवाली से निकलकर मैं वापस पहाड़ों की तरफ चढ़ने लगा था, तभी अचानक मेरी नजर एक स्टीम इंजन पर पड़ी जो सड़क के किनारे खड़ा हुआ था, आश्चर्य की बात थी इतनी ऊंचाई पर रेलवे का स्टीम इंजन। फिर मेरी नजर उसके पास लगे एक बोर्ड पर पड़ी जिसपर लिखा था "WELCOME TO COUNTRY INN". ये वही होटल है जो मथुरा के पास कोसीकलां से कुछ आगे भी हाईवे पर स्थित है और वहां पर भी इसी प्रकार का एक स्टीम इंजन खड़ा हुआ है।  मतलब यह इंजन इस होटल की खास पहचान है, जहाँ कहीं भी ऐसा इंजन आपको ऐसे टूरिस्ट स्थलों पर देखने को मिले तो समझ जाना यह रेलवे की संपत्ति नहीं, कंट्री इन होटल की संपत्ति है।  हालाँकि इस होटल में बड़े बड़े लोगो का ही आना जाना होता है, हम जैसे मुसाफिरों का यहाँ क्या काम।  इसलिए इस इंजन के फोटो खींचे और आगे बढ़ चला।

      कुछ ही देर में हम भीमताल में थे, नैनीताल के तालों मे ही नहीं बल्कि पूरे कुमाँयू क्षेत्र का सबसे बड़ा ताल है। इसका आकर त्रिभुजाकार है। भीमताल की समुद्रतल से ऊंचाई 1370 मीटर है और यह नैनीताल से लगभग 22 किमी दूर है। भीमताल झील के बीच में एक द्धीप भी है जिस पर एक रेस्टोरेंट स्थित है और एक शिव मंदिर भी है।  मान्यता है कि पांडवों के वनवास के दौरान सबसे बलशाली पांडव भीम ने इस झील का निर्माण किया था जिसकारण इसे भीमताल के नाम से जाना जाता है। कुछ देर भीमताल में रुकने के पश्चात् हम नौकुचिया ताल के लिए रवाना हो गए।

     भीमताल से नौकुचिया ताल की कुल दूरी पांच किमी है। नौकुचियाताल में हम जिस झील के किनारे खड़े हुए वह आकर में एक छोटी और चतुर्भुजाकार  थी जिसमे कमल के पुष्प प्रचुर मात्रा में थे।  मैंने यहां कई वर्षों बाद अपने देश के राष्ट्रीय पुष्प को खिलते हुए देखा था किन्तु जितना मुझे इस झील के बारे पता था यह नौकुचिता ताल झील नहीं थी उसका एक मात्र भाग थी, कल्पना के कहने पर मैं कुछ और आगे बढ़ा तो कुछ दुकाने और घोड़े वाले मुझे खड़े हुए दिखाई दिए और दिखाई दी कुमांयूँ मंडल की सबसे गहरी झील नौकुचिया। 

      इस झील की गहराई 39 मीटर है और इसका आकार नौ भुजाकार है इसलिए इसे नौकुचिया झील कहा जाता है। यहाँ कल्पना ने उत्तराखण्ड के परिधान में कुछ फोटो खिंचवाए। अब शाम हो चली थी और हमारे रुकने का अभी कोई इंतज़ाम नहीं था। मुझे अब घर की याद आने लगी थी और अपनी नैनीताल की इस यात्रा को यहीं तक पूरा कर मैं वापस अब घर की तरफ लौट लिया था लेकिन घर अभी भी हमसे काफी दूर था।


कंट्री इन् वालों का स्टीम इंजन 



भीमताल झील के सामने एक मूर्ति 

भीमताल प्रथम दर्शन 

कुमाँयू की सबसे बड़ी झील 




नौकुचिया ताल - प्रथम दर्शन 










अगला भाग - काठगोदाम रेलवे स्टेशन पर एक रात

KAINCHI DHAM



पर्वतीय फल बाजार भुवाली और कैंची धाम


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     श्री नैना देवी जी के दर्शन करने के पश्चात् दोपहर करीब दो बजे हम खाना खाकर नैनीताल से कैंचीधाम की तरफ निकल पड़े। कैंची धाम से पहले हम नैनीताल से कुछ दूर स्थित भुवाली पहुंचे।  भुवाली समुद्र तल से 1106 मीटर की ऊँचाई पर स्थित बहुत बड़ा पर्वतीय फल बाजार है। यहाँ से एक रास्ता अल्मोड़ा और रानीखेत के लिए गया है दूसरा मुक्तेश्वर की ओर , तीसरा भीमताल की तरफ और चौथा नैनीताल की तरफ जिस पर से हम अभी होकर आये हैं। सबसे पहले मैंने अपनी बाइक को अल्मोड़ा की तरफ मोड़ दिया जहाँ से मैं रानीखेत जाना चाहता था परन्तु समय की कम उपलब्धता की वजह से कैंची धाम तक ही सफर पूरा किया। भुवाली में पर्यटन दृष्टि से कुछ भी महत्वपूर्ण नहीं है परन्तु यहाँ की सुंदरता और प्राकृतिक वातावरण हर सैलानी को यहाँ आने के लिए विवश कर देते हैं।  

     कैंची धाम भुवाली से 8 किमी दूर एक शानदार मंदिर या आश्रम है जिसकी स्थापना का श्रेय बाबा नीमकरोली जी महाराज को जाता है। यह इतना शानदार धार्मिक स्थल है कि नैनीताल आने वाले अधिकतर सैलानी यहाँ अवश्य आते हैं। यहाँ आकर वास्तव में मन को अद्भुत शांति और संतोष प्राप्त होता है।  15 जून को इसकी स्थापना के शुभ अवसर पर यहाँ प्रत्येक वर्ष विशाल भंडारे का आयोजन होता है। हम यहाँ 15 तारीख से कई दिन बाद पहुंचे अन्यथा हम भी इस विशाल भंडारे को अपनी आँखों से देख सकते और यहाँ बनने वाले अति स्वादिष्ट प्रसाद का भोग पाते। यह इच्छा भी आगे चलकर अवश्य पूरी की जाएगी क्योंकि अभी रानीखेत और अल्मोड़ा हमारे कैमरे के नजर से दूर जो रह गए थे।

    कैंची धाम में कुछ देर रूकने के बाद हम वापस भुवाली की तरफ रवाना हो लिए, देवदार के घने वृक्षों से घिरा  यह रास्ता देखने में बहुत ही मनोरम लगता है, यहाँ के शानदार घुमावदार सड़कों पर बाइक चलाना मेरे लिए एक शानदार अनुभव था, हालाँकि कुछ पल के लिए मुझे इन रास्तों पर बाइक चलाने के दौरान चक्कर से भी महसूस हुए परन्तु वो लगातार कल से बाइक चलाने और पर्याप्त नींद न ले पाने कारण हुआ था।  भुवाली में मैंने कुछ देर रूककर आराम किया और फिर अपने गंतव्य की ओर रवाना हो गया।

कैंचीधाम आश्रम 

भुवाली की तरफ 


रास्ते में एक स्थान पर थोड़ा आराम 

क्षिप्रा नदी 

मेरी पत्नी कल्पना 

कैंचीधाम आश्रम 

कैंची धाम आश्रम 



मेरी बाइक कैंची धाम के दर्शन करते हुए


अगला भाग - भीमताल और नौकुचियाताल 

NAINITAL



झीलों की नगरी नैनीताल की एक सैर

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       उत्तराखंड राज्य के कुमाँयू मंडल में समुद्र तल से 1938 मीटर की ऊँचाई पर स्थित नैनीताल विश्व पर्यटन के मानचित्र पर एक ऐसा पर्यटन स्थल है जहाँ सबसे अधिक झीलें हैं। नैनीताल उत्तराखंड का एक काफी बड़ा जिला है जिसकी स्थापना 1891 ईसवी में हुई। नैनीताल नगर तीन ओर से टिफिन टॉप, चाइनापीक, स्नोव्यू आदि ऊँची इंची पहाड़ियों से घिरा है। नैनीताल का ऊपरी भाग मल्लीताल और निचला भाग तल्लीताल कहलाता है।  वर्ष 1990 में नैनीताल के मल्लीताल में राजभवन या सचिवालय भवन की स्थापना की गई जिसका उत्तर प्रदेश की ग्रीष्म कालीन राजधानी के रूप में उपयोग किया जाता था। उत्तराखंड के अलग राज्य बनने के बाद 9 नवंबर 2000 को इस भवन को उत्तराखंड के उच्च न्यायालय के रूप में परवर्तित कर दिया गया। 

       नैनीताल का मुख्य आकर्षण यहाँ स्थित नैनी झील है जो 7 पहाड़ियों से घिरी है, जिनमे सबसे ऊँची पहाड़ी नैना या चाइना पीक है। नैनी झील की खोज 1841 में सी. पी. बैरन ने की थी।  नैनी झील के किनारे पर 51 शक्तिपीठ धामों में से एक शक्तिपीठ माँ नैना देवी का मंदिर भी स्थित है, पौराणिक मान्यताओं के अनुसार भगवान शिव देवी सती के मृत शरीर को ले जा रहे थे तो उनकी एक आँख यहाँ गिरी और झील का निर्माण हो गया। नैनी झील को गौर से देखने पर पता चलता है कि इसका आकर एक आँख की तरह ही है जो सती की दाहिनी आँख कहलाती है। बाईं आँख हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर नामक स्थान के पास गिरी और वहां भी नैना देवी के नाम से एक शक्तिपीठ स्थापित है।  

       सबसे पहले हम ठहरने के लिए कोई उपयुक्त और सस्ता होटल तलाश करने लगे किन्तु सीजन के चलते मुझे कहीं भी कोई होटल नहीं मिला और मैंने नैनीताल में रुकने का इरादा त्याग दिया। परन्तु हमें नहाधोकर अपने कपडे तो बदलने ही थे जो कल से बाइक पर चलते हुए काफी मैले हो चुके थे और जब अब हम अपनी मंजिल पर पहुँच ही गए थे तो कपडे बढ़ाकर घूमना लाजमी था।  काफी देर तक जब नहाने धोने की व्यवस्था  तो मैं तल्लीताल में बस स्टैंड से थोड़ा आगे होटल की तलाश करते हुए एक स्नानागार पर पहुँचा।  मैंने सोचा जब मुझे यहाँ रात को रुकना ही नहीं है तो क्यों न इसी स्नानागार में नहा धोकर तैयार हो लिया जाये और फिर हमने वही किया, उसी स्नानागार में मात्र तीस रूपये के खर्चे में हम नहा धोकर तैयार हो गए और वापस मल्लीताल की तरफ आ गए।

    मैंने अपनी बाइक को झील के किनारे एक सड़क पर खड़ा कर दिया फिर मैं और कल्पना नैनीझील में नौका विहार का आनंद लेने लगे।  नैनीताल में इस समय ग्रीष्मकालीन सीजन चल रहा था इसलिए यहाँ हमारे अलावा अनेको पर्यटक यहाँ आये हुए थे। करीब एक घंटे की नौका विहार करने के बाद मैं और कल्पना नैना देवी जी के मंदिर पहुंचे। यह एक काफी शानदार मंदिर है जहाँ नैना देवी जी के शानदार दर्शन कर मन खुश हो गया। मौसम भी काफी सुहावना हो गया था, बादलों ने नैनी झील और पहाड़ियों को अपने अधीन इस कदर कर लिया कि अब तक हरी भरी दिखने वाली वादियाँ सफ़ेद चादर में लिपटी नजर आ रही थीं। नैनीताल के खुशनुमा मौसम को देखने के लिए ही हज़ारों सैलानी हर वर्ष यहाँ आते हैं और गर्मियों की छुट्टियों का लुफ्त उठाते हैं। नैना देवी के मंदिर के बाहर बने रेस्टोरेंट में खाना खाकर हम नैनीताल का बाजार घूमने निकले।  

     नैनीताल देखने के बाद मैं अब पर्वतीय फल बाजार भुवाली और वहां से कैंचीधाम की ओर निकल पड़ा। 



नैनीताल में पहली बार कैमरे से फोटोग्राफी 

दो मुसाफिर नैनीताल में 

हमारा नौका चालक 

नैनीताल 

NAINI LAKE, NAINITAL

NAINI LAKE, NAINITAL

NAINI LAKE, NAINITAL 


THE VIEW OF NAINITAL CITY

NAINI OR CHAINA PIK

शानदार नैनीताल 

नैनीताल की शानदार झील नैनी झील 

NAINITAL


झील के दूसरी तरफ एक मंदिर 


ऐसी नौकाएं ही नैनीताल का आकर्षण हैं 

NAINA DEVI TEMPLE, NAINITAL

NAINA DEVI TEMPLE, NAINITAL

NAINA DEVI TEMPLE, NAINITAL

KALPANA IN NAINA DEVI TEMPLE, NAINITAL



KALPANA UPADHYAY MY WIFE


MY FIRST DSLR PIC


NAINA DEVI TEMPLE, NAINITAL




NAINA DEVI TEMPLE, NAINITAL

CLOCK TOWER IN NAINITAL

NAINITAL MOSQUE

PARKING STAND IN NAINITAL