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Saturday, October 21, 2017

AGRA KOLKATA EXPRESS


बिहार की तरफ एक सफ़र

इस यात्रा को शुरू से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें

आज भैया दौज का त्यौहार था, अपनी बहनो से सुबह पाँच बजे ही टीका करवाकर मैं अकेला ही उस सफर पर निकल पड़ा जहाँ जाने के लिए ना जाने कब से मैं विचार बना रहा था।  सुबह सुबह हलकी ठण्ड शुरू हो चुकी थीं। मैं पैदल ही स्टेशन पहुँच गया था। आगरा कैंट से चलकर कोलकाता जाने वाली 13168 कोलकाता एक्सप्रेस मुझे मथुरा स्टेशन पर तैयार खड़ी हुई मिली। यह ट्रेन आगरा से तो खाली आती है परन्तु मथुरा आकर यह फुल हो जाती है। अधिकतर बंगाल के लोग इस ट्रेन का उपयोग कोलकाता से मथुरा आने के लिए ही करते हैं। और मथुरा से ही यह कोलकाता जाने के लिए। खैर मैं आज बिना रिजर्वेशन था, जनरल कोच में मुझे जगह नहीं दिखी इसलिए  में खड़े खड़े ही सफर शुरू कर दिया।

Monday, October 16, 2017

BESANWA FORT




 बेसवाँ किला 

        अलीगढ़ और मथुरा की सीमा पर स्थित इगलास तहसील के अंतर्गत बेसँवा क़स्बा पड़ता है। इस कस्बे में एक ऊँची हवेली है जिसे बेसवाँ किले के नाम से जाना जाता है। मुझे इस किले का इतिहास तो नहीं पता परन्तु इस किले से जुड़े साक्ष्यों से केवल इतना पता चला है कि यह किसी समय हाथरस रियासत का ही एक हिस्सा था। मुरसान किले के राजा महेंद्र प्रताप सिंह के पूर्वजों की वंशावली का इस किले से सीधा सम्बन्ध है। हालांकि यह कोई पर्यटक स्थान नहीं है किन्तु भारतीय इतिहास में यह किला महत्वपूर्ण स्थान रखता है। मैंने बचपन में ही इस किले के बारे में सुन रखा था इसलिए हर बार इसे देखने की इच्छा मन में रहती थी। आज जब गोरई की तरफ जा रहा था तो रास्ते में  बेसवाँ पड़ा तो लगे हाथ इस किले को भी देख लिया। आज भी यहाँ इस किले के वंशज इसमें निवास करते हैं।

Saturday, October 14, 2017

AKBAR TOMB




अकबर और जोधाबाई का मक़बरा 


       यूँ तो आगरा शहर की स्थापना 1504 ईसवी में सिकंदर लोदी ने की थी। आगरा से कुछ दूर दिल्ली मार्ग पर उसने सिकंदराबाद नामक शहर बसाया था जो कालांतर में सिकंदरा ने नाम से आज भी स्थित है।  परन्तु यह सिकंदरा आज सिकंदर लोदी के कारण नहीं बल्कि मुग़ल सम्राट अकबर के मकबरे के कारण विश्व भर में विख्यात है। बेशक़ आगरा शहर की स्थापना सिकंदर लोदी ने की हो मगर आगरा को पहचान अकबर के शासनकाल में ही मिली जब उसने इसे अपनी राजधानी बनाया और आगरा किला का निर्माण कराया। अकबर ने अपनी मृत्यु से पूर्व ही अपने मकबरे का भी निर्माण करा लिया था। उसकी एक पत्नी मरियम का मकबरा भी सिकंदरा के पास ही स्थित है। परन्तु मुझे खोज थी उसकी प्रिय पत्नी जोधाबाई की, अकबर के बाद वो कहाँ गई ? क्या उसका भी कोई मकबरा स्थित है ? आगे जानिये।

Thursday, October 12, 2017

RADHAKUND



 राधाकुंड मेला - अहोई अष्टमी की एक रात


       माना जाता है कि अहोई अष्टमी की मध्य रात्रि को राधाकुंड में स्नान किया जाये तो एक वर्ष के अंदर संतान प्राप्ति का सुख निश्चित प्राप्त होता है। कृष्ण पक्ष की अष्टमी को मध्य रात्रि राधाकुंड में स्नान करने का पौराणिक महत्त्व है इस दिन ब्रज की अधिष्ठात्री देवी श्री राधारानी इस कुंड में एक साथ स्नान करने वाले भक्तो को संतान प्राप्ति का फल देती हैं और साल भर के भीतर उनके यहाँ संतान जन्म लेती है। इस दिन गोवर्धन मथुरा स्थित राधाकुंड में विशाल मेला लगता है। राधाकुंड का निर्माण स्वयं भगवान कृष्ण ने अपनी बांसुरी की नोक से खोदकर किया था जब उन्होंने बछड़े का रूप लेकर आये महादैत्य अरिष्टासुर का वध किया था जिससे उन्हें गोहत्या का पाप लगा। राधारानी के कहने पर इस पाप से मुक्ति पाने के भगवान कृष्ण ने सभी तीर्थों का जल राधाकुंड में मिलकर उसमे स्नान किया और गोहत्या के पाप से मुक्ति पाई साथ ही राधारानी को यह वरदान दिया कि कृष्ण पक्ष की अष्टमी की मध्य रात्रि जो भी इस कुंड में स्नान करेगा उसे संतान की प्राप्ति अवश्य होगी।

Saturday, October 7, 2017

PAGALBABA TAMPLE


पागलबाबा मंदिर 



     मेरी माँ बचपन से ही हर अमावस्या को श्री ठाकुर जी के दर्शन करने आगरा से वृन्दावन जाती थीं, मथुरा से वृन्दावन जाते समय एक बहुमंजिला मंदिर पड़ता था जिसे देखकर मैं माँ से पूछता था कि माँ यह मंदिर किसका है, माँ जवाब दे देती थी पागल बाबा का। भच्पन बहुत ही चंचल होता है जानने की बड़ी  इच्छा होती थी कि  इन्हे पागलबाबा क्यों कहते हैं।  धीरे धीरे समय गुजर गया और मैं बड़ा हो गया, आज जब ठाकुरजी की कृपा से अपना आशियाना और नौकरी ब्रज में ही है तो क्विड लेकर मांट से सीधे कालिंदी के किनारे पहुँचा एक पीपों से बने हुए पल को पारकर मैं वृन्दावन पहुँचा और मथुरा रोड पर स्थित पागलबाबा के दर्शन किये।  और वहां जाकर जाना कि पागलबाबा कौन थे। गूगल पर जाकर आपको इनकी कहानी पढ़ने को मिल जाएगी। हम तो घुम्मकड़ हैं बस अपनी यात्रा का विवरण ही दे सकते हैं। 

Monday, February 1, 2016

GONDA-PILIBHIT TRAIN

                                                   


                                                   गोंडा - पीलीभीत पैसेंजर ट्रेन यात्रा


नानपारा से हम मैलानी ओर चल दिए,  यह सफर मीटर गेज ट्रेन का एक अदभुत सफर है जो सरयू नदी के ऊपर बने बाँध के किनारे होता हुआ नेपाल की तराई में दुधवा नेशनल पार्क के बीच से होकर गुजरता है । मेरी बचपन की पसंदीदा ट्रेन गोकुल एक्सप्रेस इसी रास्ते से होकर गोंडा आगरा फोर्ट पहुंचती थी और आज यह ट्रेन केवल पीलीभीत तक ही सीमित है क्योंकि पीलीभीत से आगे की लाइन अब ब्रॉड गेज  कन्वर्ट हो चुकी है जल्द ही यह ट्रेन गोंडा से मैलानी रह जाएगी ।

Friday, October 11, 2013

AGRA



आगरा की गलियों में

   आज न जाने क्यों अपना ही शहर घूमने का ख्याल दिल में आया, सोचा दूर दूर से लोग जिस शहर को देखने आते हैं उसी शहर को छोड़ हम दूसरी जगहों पर जाते हैं और पाते हैं कि एक बार आगरा आना इस इस देश के हर इंसान का सपना है, और हो भी क्यों ना जब स्वर्ग में जिस महल की बुनियाद रखी गई हो और मोहब्बत के नाम पर जिसे जमीं  पे उतारा गया हो और उसकी ताजगी के नाम पर उसे ताज महल पुकारा गया हो उसे कौन नहीं देखना चाहेगा । 
 
     पर आज मैं आपको ताजमहल नहीं, आगरा की उन जगहों पर जाऊंगा जहाँ शायद ही लोग जाना पसंद करते हैं, उन जगहों में सबसे पहले मेरी यात्रा वाहेगुरु का नाम लेकर आगरा के प्रसिद्द गुरुद्वारा, गुरु का ताल से प्रारम्भ करूँगा। 


  • गुरु का ताल - गुरुद्वारा        
       राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या - 2 पर आगरा से दिल्ली की तरफ जाने पर आगरा शहर से मात्र ३ किमी की दूरी पर स्थित गुरुद्वारा भारतीय इतिहास में काफी महत्त्व रखता है। 


GURU KA TAAL. AGRA

GURU KA TAAL, AGRA

GURU KA TAAL , AGRA

GURU KA TAAL, AGRA

GURU KA TAAL , AGRA


  • दिल्ली गेट - मुग़ल सम्राट अकबर के समय का स्थित आगरा से दिल्ली की ओर  मार्ग में आगरा शहर का उत्तरी दरवाजा दिल्ली द्वार स्थित है । वर्तमान में यह राजा की मंडी रेलवे स्टेशन के बाहर स्थित है । 


  
दिल्ली दरवाजा , आगरा 



ताजमहल 
यमुना नदी के बायें तट पर स्थित ताजमहल आगरा की ही नहीं बल्कि सारी दुनिया की सबसे खूबसूरत ईमारत है जो दो दिलों के अटूट प्रेम को अपनी सुंदरता के रूप में लगातार कई वर्षों से समेटे हुए है । प्रतिदिन हजारों पर्यटक इसकी सुंदरता को देखने के लिए दुनिया के कोने कोने से आते हैं और इसे देखकर अपने प्रेम को अनुभव करते हैं ।
स्थिति :-  ताजमहल जाने के लिए आगरा के हर कोने से रास्ता उपलब्ध है, आगरा कैंट रेलवे स्टेशन से इसकी दूरी लगभग आठ किमी है, आगरा कैंट रेलवे स्टेशन से ताजमहल जाने के लिए हर समय ऑटो उपलब्ध हैं । ताजमहल जाने के लिए आगरा कैंट के अलावा राजा की मंडी, आगरा किला और ईदगाह आगरा जंक्शन मुख्य रेलवे स्टेशन हैं । बस द्वारा भी ताजमहल पहुँचने के लिए आगरा में कई बस स्टैंड उपलब्ध हैं जिसमे आईएस बी टी , आगरा फोर्ट , और ईदगाह मुख्य हैं ।
इतिहास : - ताजमहल संगमरमर से बानी एक नायब खूबसूरत ईमारत है जो कि बादशाह शाहजहां ने अपनी बेगम मुमताज महल की याद में बनबाया था ।  कहा जाता है कि शाहजहां और मुमताज एक दुसरे के अत्यन्य प्रेमी थे, जो एक दुसरे से कभी अलग नहीं रहते थे इसीकारण जब शाहजहां का दख्खन युद्ध हुआ तो मुमताज महल भी उसके साथ थी । यहीं पर उसने अपने चौदहवें बच्चे को जन्म दिया जो भारतीय इतिहास में  जहाँआरा के नाम से जानी गई । पुत्री को जन्म देने के बाद मुमताज की तबियत बिगड़ती गई, कहावत है कि  उसने अपने मारने से पहले शाहजहां से यह वचन लिया कि वह उसकी कब्र पर उसी के समान अत्यंत खूबसूरत ईमारत का निर्माण करेगा जो उसके मरने के बाद भी उसके प्यार को जिन्दा रखेगा और साड़ी दुनिया को उसके प्रेम का सन्देश देगा ।


Monday, October 7, 2013

VARANASI

पहली काशी यात्रा 


    अभी एक महीना ही हुआ था इलाहाबाद से लौटे हुए कि दुबारा रेलवे का कॉल लैटर आ गया,  इसबार यह मेरे नाम से आया था। सेंटर इलाहाबाद में ही था इसलिए एक इलाहाबाद की टिकिट बुक करा ली, इसबार मेरी माँ मेरे साथ इलाहाबाद जा रही थी, उनका भी पी टी ओ पापाजी बनवा दिया और इलाहाबाद की एक और टिकिट बुक हो गई ।

    एग्जाम से एक दिन पहले ही हम इलाहाबाद के लिए निकल लिए,दुसरे दिन हम इलाहाबाद में थे स्टेशन पर काफी लड़कों की भीड़ थी जिन्हे देखकर यह एहसास दिल को हुआ की इस देश के अंदर एक अकेले हम ही बेरोजगार थे, हमारे जैसे जाने कितने ही न थे जो आज मुझे यहाँ देखने को मिले ।

Sunday, September 8, 2013

SARNATH


सारनाथ दर्शन 

    माँ को वाराणसी स्टेशन पर छोड़कर मैं एक पैसेंजर ट्रेन के जरिये सारनाथ पहुँच गया, सबसे पहले स्टेशन के शाइन बोर्ड को देखा,  यह और स्टेशनों की अपेक्षा कुछ अलग लगा फिर ध्यान आया कि मैं महात्मा बुद्ध की भूमि में हूँ और उन्ही के धम्म के अनुसार रेलवे ने इस स्टेशन का बोर्ड भी बनाया है। सारनाथ पूर्वोत्तर रेलवे का एक छोटा सा स्टेशन है परन्तु ऐतिहासिक दृष्टि से बहुत ही महत्वपूर्ण भी है।

   मैं स्टेशन से बाहर आया और थोड़ा सा आगे बढ़ा तो सारंगनाथजी के दर्शन हुए, यह एक बहुत बड़ा शिव मंदिर है यहीं पास में एक बहुत बड़ा कुण्ड है जिसमे लोग मेले के दिनों में स्नान भी करते हैं । सारंगनाथ जी के दर्शन कर मैं महात्मा बुद्ध की तरफ बढ़ रहा था कि इसी बीच यहाँ काफी तेज वर्षा शुरू हो गई ।मतलब घूमने का दुगुना आनंद ।

   मैं महात्मा बुद्ध के मंदिर में पहुंचा यह काफी अच्छा और बहुत ही सुन्दर स्थान है,  यहाँ अकेले आकर मुझे एहसास हुआ कि यह मेरी सबसे बड़ी गलती थी। मंदिर के प्रांगण में  छोटा सा चिड़ियाघर भी है जिसमे कोई ज्यादा जीव जंतु नहीं थे परन्तु फिर भी यह प्रेमी युगलों की वजह से आज भी गुलजार है।

   कुलमिलाकर सारनाथ पर्यटन की दृष्टि से बहुत ही सुन्दर स्थान है जो वाराणसी से महज दस किमी  की दूरी  पर है। सारनाथ में चाइना मंदिर, तिब्बत मंदिर और अन्य विशेष स्थान देखने लायक हैं । इसके साथ ही सारनाथ से रेलवे स्टेशन के रास्ते पर सारंगनाथ जी का मंदिर भी अति दर्शनीय है।

सारनाथ से एक ऑटो पकड़कर वाराणसी स्टेशन आ गया, शाम को मरुधर एक्सप्रेस से हम आगरा वापस आ गए ।

सारनाथ 

सारनाथ रेलवे स्टेशन 

सारनाथ स्टेशन 

सारनाथ स्टेशन का शाइन बोर्ड 

सारनाथ रेलवे स्टेशन 

सारनाथ रेलवे स्टेशन 

सारनाथ स्टेशन पर चाय की एक दुकान 

SARNATH RAILWAY STATION

सारंगनाथ जी का मंदिर 

सारंगनाथ मंदिर की तरफ 

सारंगनाथ मंदिर 

SARANGNATH

SARANG NATH

SARANGNATH  POND




सारनाथ 

ASHOKA STAMBH

सारनाथ 

SARNATH

SARNATH

SARNATH

SARNATH

SARNATH

SARNATH

SARNATH

SARNATH

SARNATH

SARNATH

SARNATH

SARNATH

SARNATH

SARNATH


SARNATH


S.KUMAR IN SARNATH

SARNATH

SARNATH

SARNATH










          

Sunday, September 1, 2013

PRAYAG GHAT


बुंदेलखंड एक्सप्रेस से एक सफ़र 

 
      मैं जब कभी किसी यात्रा पर जाता हूँ तो उसकी तैयारी महीने भर पहले से ही शुरू कर देता हूँ। अभी मैं अपनी राजस्थान यात्रा की तैयारी कर ही रहा था कि अचानक किशोरी लालजी का फोन आया,बोले भाई साहब इलाहाबाद चलना है। दरअसल किशोरीलाल जी मेरे बहनोई हैँ और नोयडा में नौकरी हैं, आज से दो साल पहले रेलवे का कोई फॉर्म भरा होगा आज उसी का कॉललैटर आया है। अब अचानक से किसी यात्रा की तैयारी करना मेरे लिए कोई कठिन काम नहीं था, बस मुश्किल था तो इलाहबाद जाने वाली किसी भी ट्रेन में उपलब्ध सीट का मिलना । 

Saturday, July 6, 2013

LUCKNOW

 लखनऊ की एक शाम 



    हालाँकि मैं पूरी रात का जगा हुआ था सो ऊपर वाली सीट पर सो गया और जब उठा तो देखा ट्रेन लखनऊ शहर में दौड़ रही थी , रास्ते में कुछ स्टेशन पड़े जिनके फोटू मैंने नीचे लगा दिए हैं देखा लेना । ट्रेन शाम को
 4:30 बजे ट्रेन ऐशबाग स्टेशन पहुंची , मेरा रूहेलखंड एक्सप्रेस से सफ़र यही पर समाप्त हो गया । ट्रेन को अकेला छोड़कर मैं ऐशबाग से चारबाग की ओर चल दिया , और रूहेलखंड एक्सप्रेस खड़ी रही सुबह फिर किसी मेरे जैसे मुसाफिर को ले जाने के लिए कासगंज की ओर ।


रूहेलखंड के नज़ारे



रूहेलखंड के नज़ारे 


    वैसे तो बरेली को रूहेलखंड ही कहा जाता है , पर असली रूहेलखंड के नज़ारे तो बरेली से आगे ही शुरू होते हैं । एक्सप्रेस अपनी रफ़्तार में दौड़ रही थी , ट्रेन में सभी यात्री रूहेलखंडी थे, उनकी भाषा से मुझे इस बात का आभास हुआ , वाकई उनकी भाषा बड़ी ही मिठास भरी थी। इधर चारों तरफ हरियाली ने मेरा मन मोह लिया था और मौसम भी सुहावना था , हल्की बारिश हो रही थी , तभी एक स्टेशन आया बिजौरिया । बारिश में हरियाली के साथ साथ मौसम ने वक़्त को काफी खुशनुमा बना दिया था । 

Friday, July 5, 2013

बरेली की यात्रा


 बरेली की यात्रा 


     सुबह का सफ़र बड़ा ही सुहावना होता है खासतौर पर सूरज निकलने से पहले, यूँ तो गर्मी के दिन थे पर मुझे सर्दी का अनुभव होने लगा था, ट्रेन अपनी रफ़्तार से दौड़ रही थी थोड़ी देर में एक वीराने में स्टेशन आया कासगंज सिटी ।यूँ तो स्टेशन का नाम कासगंज सिटी है पर मुझे यहाँ कहीं भी सिटी जैसी कोई चीज़ नजर नहीं आयी, था तो सिर्फ वीराना और खेत खलिहान। ट्रेन एक एक्सप्रेस गाड़ी थी, सो बड़ी स्पीड के साथ स्टेशन से निकली मैं फोटू ही नहीं ले पाया ।

रूहेलखंड एक्सप्रेस से एक सफ़र




कासगंज स्टेशन पर एक रात 


    आज मेरा मन मीटर गेज की ट्रेन से यात्रा करने का था सो प्लान बना लिया कि कासगंज से गोंडा के रूट पर 
यात्रा की जाए । दिन गुरूवार था, आगरा कैंट से कोलकाता के लिए सुपरफास्ट जाती है कासगंज होकर जो रात ८ बजे कासगंज पहुँच जाती है। और कासगंज से 9:15 pm पर बरेली तक जाती है और वहां से सुबह 4 बजे गोंडा के लिए पैसेंजर जाती है । प्लान तो अच्छा था लेकिन शायद किस्मत को कुछ और ही मंजूर था , कोलकाता  एक्सप्रेस आज चार घंटे लेट हो गई और गोंडा जाने का प्लान ठप्प हो गया । 

     रात बारह बजे कासगंज पहुंचा, सन्नाटा था , प्लेटफोर्म पर यात्री सोये पड़े थे शायद टनकपुर जा रहे थे । या फिर कानपुर की ओर। खैर अपनी मंजिल कुछ और ही थी । गोंडा की तो कोई ट्रेन नहीं थी लेकिन लखनऊ की थी रूहेलखंड एक्सप्रेस जो सुबह पांच बजे चलकर शाम को पांच बजे लखनऊ पहुँच जाती है, यानी बारह घंटे का सफ़र पर बहुत ही मजेदार । कैसे ? आगे जानिये । 

Friday, June 14, 2013

एटा पैसेंजर से एक यात्रा



एटा यात्रा 


    यूँ तो एटा आगरा के नजदीक ही है, दोनों में केवल 85 किमी का ही फासला है परन्तु मेरा एटा जाने का जब भी विचार बनता तो कोई न कोई अड़चन आ ही जाती थी और एटा जाने का विचार आगे के लिए खिसक जाता था । एटा के लिए रास्ता टूंडला होकर गया है , और टूंडला से ही एक रेलवे लाइन बरहन होकर एटा के लिए गई है , जिस पर दिन में एक ही पैसेंजर ट्रेन चलती है जो टूंडला से एटा के २ चक्कर लगाती है, मेरा इस रेलवे लाइन को देखने का बड़ा ही मन था, पर कभी मौका नहीं मिल पाया । 

Monday, April 15, 2013

DHORPUR


अदभुत ग्राम धौरपुर 

          धौरपुर ग्राम,  दिल्ली - हावड़ा रेल मार्ग पर स्थित हाथरस जंक्शन स्टेशन से १ किलोमीटर दूर है । यह उत्तर प्रदेश के हाथरस जिले में स्थित है । हाथरस एक छोटा शहर है जिसकी सीमाए आगरा , मथुरा , अलीगढ ,एटा तथा कासगंज से छूती हैं । उत्तर प्रदेश की मुख्य मंत्री मायावती ने इसका नाम हाथरस से बदलकर महामाया नगर कर दिया था किन्तु उत्तर प्रदेश में सपा की सरकार बनने  के बाद इस जिले का नाम पुनः हाथरस रख दिया गया। पता नहीं क्यों मायावती जी को जिलों के नाम बदलने में बड़ा मजा आता है जैसे कासगंज को कांशीराम नगर बनाकर या अमरोहा को ज्योतिबा फुले नगर । खैर हमारे गाँव का नाम नहीं बदलने वाला वो तो धौरपुर ही रहेगा । फिर चाहे वो हाथरस जिले में आये या अलीगढ जिले में । 

Saturday, March 16, 2013

एक यात्रा मुरसान होकर


एक यात्रा मुरसान होकर 

     आज मैं और कुमार रतमान गढ़ी के लिए रवाना हुए । यह मेरी छोटी मौसी का गाँव है जो मथुरा कासगंज वाली रेल लाइन पर स्थित मुरसान स्टेशन से पांच किमी दूर है । आज माँ ने कहा जा अपनी मौसी के यहाँ से आलू ले आ । दरअसल मेरे मौसा जी एक किसान हैं और हरबार की तरह उनके खेतों में इसबार भी आलू हुए । इसलिए मैं भी चल दिया एकाध बोरी लेने और साथ मैं कुमार भी । 

     आगरा कैंट से होते हुए हम मथुरा पहुंचे और मथुरा से पैसेंजर पकड़कर सीधे मुरसान । मुरसान पूर्वोत्तर  रेलवे का स्टेशन है जिसका मुख्यालय बड़ा ही इज्ज़तदार है मतलब इज्ज़त नगर । जो बरेली में हैं । मथुरा से कासगंज वाली पैसेंजर ट्रेनों में अधिकतर भीड़ चलती है, कारण है सड़क मार्ग से कम समय और सस्ता किराया । परन्तु हम तो मथुरा से ही सीट पर बैठकर आये थे, बस उतरने में ही थोड़ी परेशानी हुई । 

Thursday, March 7, 2002

आयराखेड़ा ग्राम की एक बारात

   

आयराखेड़ा ग्राम की एक बारात


     काफी पुरानी बात है जब मैं हाई स्कूल में था और मेरी बोर्ड के एग्जाम नजदीक थे। मेरा आज साइंस का प्रेक्टिकल था। लैब में मुझसे एक वीकर और एक केमिकल की बोतल फूट गई जिस कारण सर ने मुझे तोड़ दिया। सजा पाकर थका हारा जब मैं घर पहुंचा तो माँ ने याद दिलाया कि आज मेरी दूर की मौसी की शादी है इसलिए मुझे आयराखेड़ा जाना पड़ेगा मैंने घडी में देखा तो दोपहर के डेढ़ बजे थे यानी आगरा कैंट से मथुरा के किये कोई ट्रेन नहीं थी ।

       आयरा खेड़ा मेरी माँ का गाँव है जो मथुरा कासगंज रेल मार्ग पर स्थित राया स्टेशन से पांच किलोमीटर दूर है। आयराखेड़ा गाँव का नाम सरकारी कागजों में बिन्दुबुलाकी है, अतः गूगल मैप में भी इसे बिन्दुबुलाकी के नाम से ही खोजा जा सकता है। मुझे याद आया कि आगरा फोर्ट से मथुरा के लिये एक ट्रेन है जिसका नाम है गोकुल एक्सप्रेस ।