Showing posts with label TIRTH STHAN. Show all posts
Showing posts with label TIRTH STHAN. Show all posts

Sunday, October 22, 2017

TARACHANDI DEVI - SASARAM



माँ ताराचंडी देवी शक्तिपीठ धाम

 इस यात्रा को शुरू से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें

           मैं रात दो बजे सासाराम स्टेशन उतर गया था, यहाँ आकर स्टेशन पर बने एक बोर्ड पर मैंने देखा कि यहाँ ताराचंडी देवी का शक्तिपीठ धाम है। सासाराम के बारे में कहा जाता है कि यह महान ऋषि परशुराम की भूमि है। सहस्रराम, सहसराम, सासाराम = परशुराम। रात को तो  स्टेशन पर बने ब्रिज पर मैं सो गया परन्तु सुबह पांच बजे में उठकर देवी ताराचंडी की तरफ निकल गया। स्टेशन से इस दिव्यधाम की दूरी मात्रा पांच किमी ही है सोचा था पैदल ही नाप दूंगा।

Saturday, October 7, 2017

PAGALBABA TAMPLE


पागलबाबा मंदिर 



     मेरी माँ बचपन से ही हर अमावस्या को श्री ठाकुर जी के दर्शन करने आगरा से वृन्दावन जाती थीं, मथुरा से वृन्दावन जाते समय एक बहुमंजिला मंदिर पड़ता था जिसे देखकर मैं माँ से पूछता था कि माँ यह मंदिर किसका है, माँ जवाब दे देती थी पागल बाबा का। भच्पन बहुत ही चंचल होता है जानने की बड़ी  इच्छा होती थी कि  इन्हे पागलबाबा क्यों कहते हैं।  धीरे धीरे समय गुजर गया और मैं बड़ा हो गया, आज जब ठाकुरजी की कृपा से अपना आशियाना और नौकरी ब्रज में ही है तो क्विड लेकर मांट से सीधे कालिंदी के किनारे पहुँचा एक पीपों से बने हुए पल को पारकर मैं वृन्दावन पहुँचा और मथुरा रोड पर स्थित पागलबाबा के दर्शन किये।  और वहां जाकर जाना कि पागलबाबा कौन थे। गूगल पर जाकर आपको इनकी कहानी पढ़ने को मिल जाएगी। हम तो घुम्मकड़ हैं बस अपनी यात्रा का विवरण ही दे सकते हैं। 

Sunday, October 1, 2017

BALDEV




दाऊजी मंदिर - बलदेव धाम 


यूँ तो मथुरा को भगवान कृष्ण और राधा की लीलास्थली के रूप में जाना जाता है किन्तु भगवान श्री कृष्ण के बड़े भाई बलभद्र जी भी थे जो कि शेषनाग के अवतार थे। कृष्ण जी उन्हें बड़े प्यार से दाऊ भईया कह कर पुकारते थे। त्रेतायुग में भगवान् राम के छोटे भाई लक्ष्मण के रूप में शेषनाग जी ने अवतार लिया था और द्वापर युग में बलभद्र के रूप ये देवकी की सातवीं संतान थे जो संकर्षण के जरिये बसुदेव जी की दूसरी पत्नी रोहिणी के गर्भ से जन्मे थे जिस कारन इन्हे संकर्षण भगवान भी कहा जाता है। मथुरा से सादाबाद मार्ग पर 20  किमी आगे बलदेव नामक स्थान जहाँ दाऊजी का विशाल मंदिर है। यहाँ दूर दूर से काफी संख्या में लोग दाऊजी के दर्शन करने आते हैं।

Saturday, February 1, 2014

UJJAINI





     उज्जैन दर्शन ( अवंतिकापुरी )


सुबह  पांच बजे ही मैं और माँ तैयार होकर उज्जैन दर्शन के लिए निकल पड़े ।  अपना सामान हमने वेटिंगरूम में ही छोड़ दिया था । सबसे पहले हमें महाकाल दर्शन करने थे, आज दिन भी सोमवार था। यहाँ महाकालेश्वर के अलावा और भी काफी दर्शनीय स्थल हैं । महाकाल के दर्शन के बाद हमने एक ऑटो किराए पर लिया और ऑटो वाले ने हमें दो तीन घंटे  में पूरा उज्जैन घुमा दिया । आइये अब मैं आपको उज्जैन के दर्शन कराता हूँ ।


Thursday, January 30, 2014

OMKARESHWAR



ओमकारेश्वर ज्योतिर्लिंग दर्शन 

 मुझे मेरी माँ को बारह ज्योतिर्लिंग के दर्शन  कराने हैं जिनमें से इस बार मैं ओम्कारेश्वर एवं महाकाल की तरफ जा रहा हूँ ।  पहली बार मैंने माँ का आरक्षण स्वर्ण जयंती एक्सप्रेस के AC कोच में करवाया था, और मैं जनरल टिकट लेकर जनरल डिब्बे में सवार हो गया, यह ट्रेन सुबह साढ़े आठ बजे आगरा कैंट से चली और रात दस बजे के करीब हम खंडवा पहुँच गए । यहाँ से हमें मीटर गेज की  ट्रेन से ओम्कारेश्वर जाना है जो सुबह जाएगी ।

Monday, September 2, 2013

MAIHAR


माँ शारदा देवी के दरबार में - मैहर यात्रा 


     मैहर धाम, इलाहाबाद - जबलपुर रेलवे लाइन पर मैहर स्टेशन के समीप है। माना जाता है कि यहाँ रात को पहाड़ पर देवी के मंदिर पर कोई भी नहीं रुक सकता है, यहाँ के लोगों का मानना है यहाँ आल्हा जो कि ऊदल के भाई होने के साथ साथ एक वीर योद्धा भी थे, आज भी देवी माँ कि पूजा सबसे पहले करने आते हैं । यह शक्तिपीठ बुंदेलखंड में स्थित है और आल्हा कि भक्ति को समर्पित है। यहाँ आल्हा ने अपना सर काटकर देवी माँ के चरणों में चढ़ाया था । जिस कारण मंदिर कि सीढ़ियाँ चढ़ने से पहले आल्हा कि मूर्ति के दर्शन होते हैं जो भाला लिए हाथी पर सवार हैं ।

Sunday, September 1, 2013

PRAYAG GHAT


बुंदेलखंड एक्सप्रेस से एक सफ़र 

 
      मैं जब कभी किसी यात्रा पर जाता हूँ तो उसकी तैयारी महीने भर पहले से ही शुरू कर देता हूँ। अभी मैं अपनी राजस्थान यात्रा की तैयारी कर ही रहा था कि अचानक किशोरी लालजी का फोन आया,बोले भाई साहब इलाहाबाद चलना है। दरअसल किशोरीलाल जी मेरे बहनोई हैँ और नोयडा में नौकरी हैं, आज से दो साल पहले रेलवे का कोई फॉर्म भरा होगा आज उसी का कॉललैटर आया है। अब अचानक से किसी यात्रा की तैयारी करना मेरे लिए कोई कठिन काम नहीं था, बस मुश्किल था तो इलाहबाद जाने वाली किसी भी ट्रेन में उपलब्ध सीट का मिलना । 

Saturday, January 1, 2011

GANGA SAGAR


गंगासागर की एक यात्रा 

         जनवरी की भरी सर्दियों में घर से बाहर कहीं यात्रा पर जान एक साहस भरा काम है और यह साहस भरा काम भी हमने किया इसबार गंगासागर की यात्रा पर जाकर।  भारत देश में अनेकों पर्यटन स्थल हैं और पर्यटन स्थल का एक अनुकूल मौसम भी होता है इसी प्रकार गंगासागर जाने का सबसे उचित मौसम जनवरी का महीना होता है क्योंकि  मकरसक्रांति के दिन ही गंगासागर में स्नान का विशेष महत्व है। मकर सक्रांति आने से पहले ही यहाँ मेले की विशेष तैयारी होने लगती है। ये लोकप्रिय कहावत प्रचलित है :- सारे तीर्थ बार बार , गंगासागर एक बार।

Wednesday, January 14, 2009

NASHIK 2009



पंचवटी की ओर 

           शिरडी से सुबह महाराष्ट्र रोडवेज की बस पकड़कर हम नासिक की तरफ रवाना हो गए, नासिक में पंचवटी नामक तीर्थस्थान है जहाँ भगवान राम, सीता और लक्ष्मण सहित वनवास के दौरान रहा करते थे और यहीं से लंकापति रावण ने सीता माता का हरण किया था। नासिक पहुंचकर हम सबसे पहले गोदावरी के घाट पर पहुंचे यहाँ कुछ दिनों पहले ही कुम्भ का मेला लगा था और अब उस मेले के शेष अवशेष बचे हैं अर्थात ख़त्म हो चूका है।

         गोदावरी स्नान करके हम पंचवटी पहुंचे, पांच बड़े बरगड़ो के पेड़ के नीचे एक गुफा है जिसे सीता जी की कितिया कहा जाता है, माना जाता है कि भगवान श्री राम ने अपनी कुटिया यहीं इसी स्थान पर बनाई थी और यह स्थान आज के धरातल से काफी नीचे समां चुका है क्योंकि त्रेतायुग को बीते हुए भी लाखों वर्ष हो चुके है।

Sunday, January 11, 2009

SHIRDI 2009





पहली शिरडी यात्रा

          घूमने का शौक तो लगा रहता है बस मंजिल तलाशनी पड़ती है । आजकल एक गाना बहुत सुनने को मिल रहा है "शिरडी वाले साईं बाबा आया है तेरे दर पे सवाली "। बस फिर क्या था मन ने ठान लिया इसबार साईबाबा से मिलकर आना है। 2782 स्वर्णजयंती एक्सप्रेस में रिजर्वेशन करवाया कोपरगाँव तक और चल दिए साईबाबा से मिलने। साथ मैं हम कुल आठ लोग थे किशोरीलालजी, रश्मि ,माँ - पापा, मैं , साधना , कुसमा मौसी, बड़ी मामी। ट्रेन ने हमें सुबह चार बजे कोपरगाँव स्टेशन पर पहुँचा दिया, यहाँ हमारी तरह और भी लोग साईबाबा  दर्शन हेतु आये हुए थे ।

Friday, February 29, 2008

ORCHHA



ओरछा दर्शन 

       मैं और माँ रात को तमिलनाडु एक्सप्रेस से सुबह तक झाँसी पहुँच गए, यहाँ हमारे एक जानकार बाबू रहते हैं जो किसी समय रेलवे में ड्राईवर थे आज रिटायर हो चुके हैं। आज उनकी स्वर्गवासी दादी का काज्य था हम उसी मैं शामिल होने गए थे, शाम को दावत खाकर हम रात को झाँसी में ही रूक गए पर इस बीच मैं अकेला जाकर झाँसी का किला देख आया। सुबह हम यहाँ से एक ऑटो द्वारा ओरछा पहुँच गए, यह बेतबा नदी के किनारे एक हिन्दू तीर्थ स्थान है जहाँ भगवान श्री राम का रामलला के नाम से विख्यात मंदिर है।