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Friday, March 23, 2018

BHATINDA PASSENGER



  फ़िरोज़पुर - भटिंडा - रेवाड़ी  पैसेंजर यात्रा 

        हुसैनीवाला से वापस में फ़िरोज़पुर आ गया, यहाँ से भटिंडा जाने के लिए एक पैसेंजर तैयार खड़ी हुई थी जो जींद की तरफ जा रही थी परन्तु मैं भटिंडा से रेवाड़ी वाली लाइन यात्रा करना चाहता था इसलिए सीधे भटिंडा का टिकट लेकर ट्रेन में पहुंचा और खाली पड़ी सीट पर जाकर बैठ गया। शाम चार बजे तक भटिंडा पहुँच गया परन्तु चार से पांच बज गए इस ट्रेन को भटिंडा के प्लेटफॉर्म पर पहुँचने में। तभी दुसरे प्लेटफॉर्म पर खड़ी रेवाड़ी पैसेंजर ने अपना हॉर्न बजा दिया, मैं जींद वाली पैसेंजर से उतरकर लाइन पार करके रेवाड़ी पैसेंजर तक पहुंचा , ट्रेन तब तक रेंगने लगी थी, इस ट्रेन में बड़ी जबरदस्त मात्रा में भीड़ थी जबकि ये भटिंडा से ही बनकर चलती है।

HUSAINIWALA BORDER


शहीदी मेला -  भगत सिंह जी की समाधि पर


           मैंने सुना था कि पंजाब में एक ऐसी भी जगह है जहाँ साल में केवल एक ही बार ट्रेन चलती है और वो है फ़िरोज़पुर से हुसैनीवाला का रेल रूट। जिसपर केवल वैशाखी वाले दिन ही ट्रेन चलती है, जब मैंने इसके बारे में विस्तार से जानकारी की तो पता चला कि यहाँ साल में एक बार नहीं दो बार ट्रेन चलती है,  वैसाखी के अलावा शहीदी दिवस यानी २३ मार्च को भी। इसलिए इसबार मेरा प्लान भी बन गया शहीदी दिवस पर भगत सिंह जी की समाधी देखना और साल में दो बार चलने वाली इस ट्रेन में रेल यात्रा करना। मैंने मथुरा से फ़िरोज़पुर तक पंजाब मेल में रिजर्वेशन भी करवा दिया। अब इंतज़ार था तो बस यात्रा की तारीख का। और आखिर वो समय भी भी आ गया।

Friday, November 21, 2014

NANGAL DAM



भाखड़ा बाँध का एक दृशय 


     अभी एक साल ही हुआ था शिमला गए हुए जब पवन भाई का चंडीगढ़ में रेलवे का टेस्ट था और मैं उनके साथ गया था, चंडीगढ़ से हम लोग शिमला और कुफरी तक गए थे। इसबार मेरा रेलवे का टेस्ट था चंडीगढ़ में पर इसबार मेरे साथ मेरी पत्नी कल्पना थी। मैंने यात्रा का प्लान कुछ इस प्रकार बनाया था कि जिसमे केवल चंडीगढ़ और शिमला ही शामिल न हो। 

       मैं और कल्पना जनरल का टिकट लेकर इंदौर - चंडीगढ़ एक्सप्रेस में बैठ लिए, दिल्ली के बाद सोने के लिए बड़े आराम से जगह मिल गई क्योंकि ट्रेन पूरी खाली हो चुकी थी। सुबह हम अम्बाला कैंट जंक्शन स्टेशन उतरे और एक शटल में बैठ गए, अम्बाला सिटी पर हमने ये शटल भी छोड़ दी क्योंकि हमे इसमें बैठने बाद पता चला कि ये अमृतसर की तरफ जा रही थी और जबकि हमें नांगल डैम जाना था। कुछ देर बाद अम्बाला सिटी स्टेशन पर नांगल डैम की शटल आई और इसका उचित टिकट लेकर नांगल डैम की तरफ रवाना हो गए। 

NAINA DEVI



 माँ नैनादेवी के दरबार में 

     हिमालय के हरे भरे जंगलों और पहाड़ों में चढ़ाई चढ़ने के बाद हमारी बस नैनादेवी पहुंची। यह नौदेवियों और 51 शक्तिपीठों में से एक हैं। कहा  जाता है की यहाँ सती की बाई आँख गिरी थी जिससे इस स्थान को शक्तिपीठों में गिना जाता है। मुख्य बाजार से सीढ़ियों के रास्ते हम मंदिर पहुंचे। मंदिर ऊंचाई पर होने के साथ साथ काफी सुन्दर बना है और हिमालय की खूबसूरत वादियां और दृश्यावलियां यहाँ से बखूबी दिखाई देती हैं।मंदिर का प्रांगण काफी बड़ा बना हुआ है और यहाँ एक ब्रिज है जो अत्यधिक भीड़ होने की स्थिति में माँ के दर्शन करने के लिए काफी राहत देता है। पिछले कुछ दिनों पहले इसी ब्रिज पर भगदड़ मच जाने के कारण यहाँ काफी बड़ी दुर्घटना घटित हो गई थी जिसमे कुछ श्रद्धालुओं को अपनी जान गँवानी पड़ी थी।

Sunday, June 23, 2013

AMRITSAR




अमृतसर रेलवे स्टेशन

होशियारपुर से हम जालंधर पहुँच गए, यहाँ से हमें अमृतसर की तरफ जाना था , तभी अलाउंस हुआ कि अमृतसर जाने वाली हीराकुंड एक्सप्रेस कुछ ही समय में प्लेटफोर्म एक पर आ रही है। मैं और कुमार टिकट लेने पहुंचे , मुझे तो टिकट मिल गई परन्तु  कुमार टिकट लेता ही रह गया, मेरे पहुंचते ही ट्रेन चल दी और कुमार प्लेटफोर्म पर ट्रेन को अपने सामने जाते हुए देखता ही रह गया, खैर बाद में आ जायेगा। ट्रेन का जनरल डिब्बा एकदम खाली था , वर्ना आगरा में तो इस ट्रेन के जनरल डिब्बे में बैठने की तो क्या खड़े होने की भी जगह नहीं मिलती।

HOSHIYARPUR




होशियारपुर रेलवे स्टेशन 

चिंतपूर्णी से सीधे ही पंजाब रोडवेज की एक बस होशियारपुर के लिए मिल गई, पहाडों की सीमा से बस मैदानी भाग की ओर जा रही थी। रास्ते में हिमाचल और पंजाब की सीमा का एक टोल प्लाजा भी मिला , पंजाब प्रान्त में आते ही सड़क एकदम शानदार हो गई।  बस दौडती हुई होशियारपुर की तरफ आ रही थी , पंजाब की बात ही अलग होती है, बस स्टैंड से एक ऑटो द्वारा हम होशियारपुर स्टेशन पहुंचे , यह उत्तर रेलवे का इस रेल लाइन का आखिरी स्टेशन है।