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Tuesday, August 9, 2016

TRAYMBKESHWAR




त्रयंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग


           पूरी रात बस द्धारा सफर करने के बाद मैं और माँ सुबह चार बजे ही नाशिक बस अड्डे पहुँच गए , बारिश अब भी अपनी धीमी धीमी गति से बरस रही थी । त्रयंबकेश्वर जाने वाली कोई बस यहाँ नहीं थी, काफी देर इंतज़ार करने के बाद  हमे एक बस मिल गई जिससे हम सुबह पांच बजे तक त्रयंबकेश्वर पहुँच गए । यूँ तो मैं पहले भी एक बार नाशिक आ चुका हूँ, जब हमने पंचवटी और शिरडी के दर्शन ही किये थे। यहाँ तक आना नहीं हो पाया था परन्तु इसबार हमारी त्रयंबकेश्वर की यात्रा भी पूरी हो चली थी। अभी दिन निकला नहीं था, बरसात की वजह से थोड़ा ठंडा मौसम था। त्रयंम्बकेश्वर मंदिर के लिए हमने बस स्टैंड से ऑटो किया जिसने पांच मिनट बाद हमे मंदिर पर उतार दिया, बस स्टैंड से मंदिर की दूरी करीब एक किमी से भी कम है।

Wednesday, January 14, 2009

NASHIK 2009



पंचवटी की ओर 

           शिरडी से सुबह महाराष्ट्र रोडवेज की बस पकड़कर हम नासिक की तरफ रवाना हो गए, नासिक में पंचवटी नामक तीर्थस्थान है जहाँ भगवान राम, सीता और लक्ष्मण सहित वनवास के दौरान रहा करते थे और यहीं से लंकापति रावण ने सीता माता का हरण किया था। नासिक पहुंचकर हम सबसे पहले गोदावरी के घाट पर पहुंचे यहाँ कुछ दिनों पहले ही कुम्भ का मेला लगा था और अब उस मेले के शेष अवशेष बचे हैं अर्थात ख़त्म हो चूका है।

         गोदावरी स्नान करके हम पंचवटी पहुंचे, पांच बड़े बरगड़ो के पेड़ के नीचे एक गुफा है जिसे सीता जी की कितिया कहा जाता है, माना जाता है कि भगवान श्री राम ने अपनी कुटिया यहीं इसी स्थान पर बनाई थी और यह स्थान आज के धरातल से काफी नीचे समां चुका है क्योंकि त्रेतायुग को बीते हुए भी लाखों वर्ष हो चुके है।

           सीता गुफा के दर्शन करने के पश्चात् हम गोराराम और कालाराम मंदिर के दर्शन करने पहुंचे और यहाँ से एक ऑटो किराये पर लेकर हमने नासिक के काफी स्थानों का भर्मण भी किया जिनमे मुख्य थे - लक्ष्मण मंदिर, जहाँ लक्ष्मण जी ने शूपर्णखाँ की नाक काटी जी जिस कारण इस शहर का नाम नासिका से नासिक हो गया।
          दूसरा स्थल था तपोवन जहाँ कपिल मुनि का आश्रम स्थित है और तीन छोटी नदियों का संगम स्थल भी, इसके बाद सीताहरण स्थल जहाँ सीता जी रावण को भिक्षा देने के आई और लक्ष्मण रेखा पार गई यहीं से रावण ने सीता का हरण किया था।

       इसके अलावा और भी काफी पौराणिक स्थल यहाँ देखने को थे जो हम समयाभाव के कारण नहीं देख सके थे थे , जैसे पांडव गुफा, त्रयंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग और तडेक वो स्थान जहाँ रावण और जटायु का युद्ध हुआ और भगवान श्री राम ने जटायु का यहाँ अंतिम संस्कार किया था।

पिछला भाग - पहली शिरडी यात्रा