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Friday, November 21, 2014

NANGAL DAM



भाखड़ा बाँध का एक दृशय 


     अभी एक साल ही हुआ था शिमला गए हुए जब पवन भाई का चंडीगढ़ में रेलवे का टेस्ट था और मैं उनके साथ गया था, चंडीगढ़ से हम लोग शिमला और कुफरी तक गए थे। इसबार मेरा रेलवे का टेस्ट था चंडीगढ़ में पर इसबार मेरे साथ मेरी पत्नी कल्पना थी। मैंने यात्रा का प्लान कुछ इस प्रकार बनाया था कि जिसमे केवल चंडीगढ़ और शिमला ही शामिल न हो। 

       मैं और कल्पना जनरल का टिकट लेकर इंदौर - चंडीगढ़ एक्सप्रेस में बैठ लिए, दिल्ली के बाद सोने के लिए बड़े आराम से जगह मिल गई क्योंकि ट्रेन पूरी खाली हो चुकी थी। सुबह हम अम्बाला कैंट जंक्शन स्टेशन उतरे और एक शटल में बैठ गए, अम्बाला सिटी पर हमने ये शटल भी छोड़ दी क्योंकि हमे इसमें बैठने बाद पता चला कि ये अमृतसर की तरफ जा रही थी और जबकि हमें नांगल डैम जाना था। कुछ देर बाद अम्बाला सिटी स्टेशन पर नांगल डैम की शटल आई और इसका उचित टिकट लेकर नांगल डैम की तरफ रवाना हो गए। 

      काफी स्टेशन स्टेशन निकलने के बाद नांगल डैम स्टेशन आया हमारी शटल यहीं तक थी और इसके बाद यह अपने गंत्वय की ओर रवाना हो गई  भी स्टेशन क्र बाहर आ गए , यहाँ से एक रिक्शा किराये पर लेकर बस स्टैंड पहुँच गए, हम यहाँ पहली बार आये थे इसलिए हमें पता ही नहीं था की बस स्टैंड स्टैंड रेलवे स्टेशन के ठीक पास ही था पर कोई बात नहीं रिक्शे वाला केवल अपनी मेहनत का ही पैसा लेकर गया था जिसका मुझे कोई अफ़सोस नहीं था। यहाँ एक प्राइवेट बस माँ नैनादेवी जाने के लिए तैयार खड़ी हुई थी और यहीं पास में एक बड़ी नहर भी थी जो भाखड़ा बाँध का ही एक हिस्सा थी। 

     बस पंजाब बॉर्डर से हिमाचल बॉर्डर को पार कर रही थी दोनों बॉर्डरों पर सुरक्षा बलों के द्वारा सख़्त चेकिन होती है और फिर इसके बाद बस में से बेहतरीन नज़ारे देखने को मिलते हैं। बस भाखड़ा बाँध के नजदीक से गुजरती है जो देखने में बहुत ही शानदार है। भाखड़ा बाँध, भारत का सबसे ऊँचा बाँध है जो की सतलज नदी पर बना है बाँध के दुसरे तरफ सतलज नदी के पानी का अथाह रुकाव है जिसे गोविन्द सागर के नाम से भी जाना जाता है। यह कितना गहरा और विशाल है इसकी गणना करना मुश्किल लगता है पर जो भी है देखने लायक स्थान है। 


नांगल डैम रेलवे स्टेशन 

कल्पना उपाध्याय नांगल डैम स्टेशन पर 

अगला भाग - माँ नैनादेवी के दरबार में