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Tuesday, October 24, 2017

MAGADH EXPRESS


मगध एक्सप्रेस -  इस्लामपुर से नईदिल्ली 


राजगीर से दोपहर दो बजे दानापुर इंटरसिटी चलती है, मुझे इसी ट्रेन से वापस पटना लौटना था क्योंकि  मेरा रिजर्वेशन आज शाम को मगध एक्सप्रेस में था जो शाम को साढ़े छः बजे पटना से रवाना होगी। मैं सही वक़्त पर स्टेशन पहुँच गया और मेरे आते ही ट्रेन भी चल पड़ी, मुझे इस सफर में बस यही अफ़सोस रहा की मैं नालंदा नहीं देख पाया परन्तु कोई बात नहीं नालंदा अभी मेरे यात्रियों की लिस्ट में शामिल रहेगा। शानदार ऐतिहासिक धरती पर सफर करने और यहाँ के नज़ारे मुझे दुबारा यहाँ आने पर आकर्षित कर रहे थे। बख्तियारपुर पहुंचकर मुझे लगने लगा था कि कहीं मगध एक्सप्रेस छूट न जाए पर मैं गलत था पटना स्टेशन पहुँचने पर पता चला की मगध तो अभी दिल्ली से आई है पहले ये इस्लामपुर जायेगी और वहां से वापस तब दिल्ली की और रवाना होगी। मैं भी अपनी उसी सीट पर जाकर बैठ गया जो मेरी पटना से दिल्ली तक बुक थी। 

रात होते होते ट्रैन इस्लामपुर पहुंची, यह पटना से आगे एक छोटा और आखिरी स्टेशन है, मगध एक्सप्रेस पहले पटना तक ही चलती थी पर अत्यधिक ट्रैफिक हो जाने की वजह से रेलवे ने इसे इस्लामपुर तक कर दिया, नॉर्थन रेलवे की यह ट्रैन नईदिल्ली से आकर वापस नईदिल्ली चली जाती है। पटना से इस्लामपुर तक यह ट्रैन लगभग पूरी खाली ही जाती है।मुझे इस सफर के दौरान इस्लामपुर तक कोई भी TTE टिकट पूछने नहीं आया। मैं फिर से  राजगीर के पास ही था। इस्लामपुर से रात ग्यारह बजे ट्रैन दिल्ली के लिए रवाना हुई और मैं मजे से अपनी सीट पर सो गया, सुबह जब आँख खुली तो देखा मैं  उत्तर प्रदेश में हूँ मिर्ज़ापुर आने वाला है। मुझे लगा था मैं दोपहर तक  पहुँच जाऊँगा यह ट्रैन अपने समय काफी लेट चल रही थी।  शाम होते होते मैं टूंडला पहुंचा, मुझे मथुरा जाना था और यह अलीगढ होते हुए सीधे दिल्ली जाएगी, इसलिए मैं टूंडला ही उतर गया और पीछे आ रही तूफ़ान एक्सप्रेस  बारह बजे मथुरा पहुंचा। 

                                                    बिहार यात्रा समाप्त 












Monday, October 23, 2017

RAJGIR STOOP


विश्व शांति स्तूप - राजगीर


जीवक का दवाखाना देखने के बाद हमारी घोड़ागाड़ी राजगीर के गिद्ध कूट पर्वत की तरफ बढ़ चली।  कहा जाता है कि यही वो पर्वत है जिस पर बैठकर महात्मा बुद्ध ने अपने शिष्यों को उपदेश दिया था। उन्ही की याद में यहाँ एक विशाल स्तूप का निर्माण कराया गया है जो राजगीर स्तूप के नाम से जाना जाता है, इसे विश्व शांति स्तूप भी कहते हैं। इस पिकनिक के लिए बेहद खूबसूरत स्थान है यहाँ स्तूप तक जाने के लिए रोपवे की व्यवस्था है यह रोपवे एक सीट का है इसलिए यह अन्य रोपवे से थोड़ा अलग और एडवेंचर लगता है। स्तूप के चारों तरफ महात्मा बुद्ध की मूर्तियां स्वर्णिम रूप में व्यवस्थित हैं। ऐसे स्तूप देश में अन्य जगहों पर भी हैं। कुछ देर मैं स्तूप के आसपास ही घूमता रहा की तभी रोपवे कंपनी का अनाउंस हुआ कि लंच का समय हो गया है रोपवे आधा एक घंटे के लिए बंद रहेगा, इसलिए जिसे जाना हो वो अभी  पहुँच सकते हैं। मैं ये सुनकर सीधे रोपवे तक पहुंचा और पहाड़ से नीचे की तरफ रवाना हो गया, रास्ते में अचनाक लाइट चली गई और रोपवे सेवा कुछ समय के लिए बंद हो गई,हम पहाड़ पर तारो के सहारे हवा में लटके हुए थे करीब पंद्रह मिनट बाद जब लाइट आई और मैं नीचे पहुंचा।

नीचे पहुंचकर मैंने टाँगे वाले बाबा को जगाया और वो मुझे लेकर वापस राजगीर पहुंचे। बाबा ने मुझे जहाँ उतरा वहीँ पास में ही वेणुवन था जो की बिम्बिसार ने महात्मा के ठहरने और रहने के लिए के लिए उन्हें भेंट किया। यह काफी बड़ा पार्क है जिसमे महात्मा बुद्ध की मूर्ति दर्शनीय है, यह एक ऐतिहासिक स्थान है जहाँ महात्मा बुद्ध ने अपने शिष्यों को उपदेश दिए थे।


राजगीर में 

































BIMBISAR JAIL



बिम्बिसार की जेल तथा जीवक का दवाखाना

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सोनभंडार से एक रास्ता जरासंध की रणभूमि की तरफ भी गया है जो यहाँ से 2 किमी की दूरी पर है। ताँगे वाले बाबा मुझे यहाँ नहीं लेकर गए और इसे बिना देखे ही मैं आगे नई मंजिल की तरफ बढ़ चला। गया मोकामा रोड पर कुछ किमी चलने के बाद बिम्बिसार की जेल आती है। कहा जाता है कि यही वो स्थान है जहाँ अजातशत्रु ने अपने पिता बिम्बिसार को कैद करके रखा था। यह स्थान स्वयं बिम्बिसार ने चयन किया था क्योंकि बिम्बिसार की महात्मा बुद्ध के प्रति विशेष आस्था थी और जहाँ यह जेल बानी थी उसके ठीक पीछे गिद्धकूट पर्वत है जिसपर महात्माबुद्ध अपने अनुयायियों के साथ निवास करते थे।

SON BHANDAR CAVE



सोन भंडार या स्वर्ण भंडार गुफा 



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      मनियार मठ से आगे चलते ही रास्ता और भी रोमांचक हो गया था, बड़े बड़े वनों के बीच से गुजरते हुए अचानक एक ढलान आई, यह एक नदी थी जो इन दिनों सूखी पड़ी हुई थी, टाँगे वाले बाबा इस पर खेद प्रकट करते हुए बोले गर सरकार इस पर एक ब्रिज बना देता तो हमका काफी सहूलियत रहता। गाडी उतर जाती तो है पर चढ़ने में घोडा को काफी दिक्कत होता है। इसके बाद एक हिरन पार्क मिला जो इनदिनों बंद था, इसमें कोई भी हिरन नहीं था। अब हमारे सामने स्वर्ण भंडार गुफा थी जो राजगीर या वैभारगिरि पर्वत को काटकर बनाई गई थी।


MANIYAR MATH


मनियार मठ 

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      जरादेवी मंदिर आगे चलकर सोन भंडार गुफा की तरफ जाते वक़्त रास्ते में मनियार मठ पड़ता है। यूँ तो यह आज एक बौद्धिक स्थल है परन्तु इसका इतिहास आजतक स्पष्ट नहीं हो सका है। जैन धर्म के अनुसार यह विदेह ( वैशाली ) की राजकुमारी और अजातशत्रु की माँ रानी चेलन्ना का कुंआ है जो उस समय में निर्माण कूप कहलाता है। इसका निर्माण गोलाकार ईंटों से हुआ है। कुछ ग्रंथों में इसे बुद्ध का स्तूप भी कहा जाता है परन्तु यह इसे देखने के बाद सच नहीं लगता क्योंकि इसकी सरंचना एक कुएँ के प्रकार की है और वास्तव में यह एक कुँआ ही है।