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Wednesday, February 20, 2013

मदुरै यात्रा




                                                                    मीनाक्षी मंदिर - मदुरै की शान 

                                                      
   सुबह पांच बजे हम मदुरै पैसेंजर से मदुरै की तरफ रवाना हुए , एक्सप्रेस ट्रेनों की अपेक्षा पैसेंजर ट्रेनों मे आपको लोकल संस्कृति देखने को मिल सकती है, क्योंकि वो जिस राज्य में से होकर गुजरती है उसकी सवारियां भी अधिकतर उसी राज्य की होती हैं। हमारे आसपास भी तमिलनाडु के ही लोग बैठे हुए थे जो आपस में बातें करते जा रहे थे , क्या बातें कर रहे थे ये मेरी समझ से बाहर था, और हम भी आपस में जब हिंदी बोल रहे थे तो वे भी नहीं समझ पा रहे थे , गर मुझे उनसे कुछ पूछना होता था तो इंग्लिश का प्रयोग करना पड़ता था । आप दुनिया के किसी भी कोने में चले जाओ इंग्लिश आपका हर जगह साथ देगी , शायद इसीलिए इसे अंतरराष्ट्रीय भाषा कहा जाता है ।

     तभी एक स्टेशन आया , नाम तो मुझे याद नहीं है पर इतना याद है कि यहाँ से ट्रेन में काफी भीड़ हो गई, मेरी सीट के पास एक स्त्री खड़ी थी , मैंने उसे बैठने के लिए कहा तो उसने मन कर दिया। मैंने तो इंसानियत का फ़र्ज़ अदा किया था, मुझे क्या पता था कि यहाँ इंसानियत का कोई सम्मान नहीं है क्योंकि यहाँ हर व्यक्ति अपने आप में एक सम्मानित इंसान था।और इस बात का आभास मुझे तब हुआ जब मेरी मुलाकात मेरे पास वाली सीट पर बैठे एक मराठी व्यक्ति से हुई , उसने मुझे बताया की यहाँ की स्त्रियाँ सिर्फ अपने पति या परिवार वाले के पास ही बैठती हैं बजे किसी दुसरे मर्द की अपेक्षा, और गर इनमे से कोई नहीं है तो बीच में गेप देकर बैठती है । और इसका उदहारण उसने मुझे मेरी माँ की तरफ इशारा करके बताया जिनके पास एक तमिल व्यक्ति बैठा हुआ था गेप देकर । मुझे इस बात का विशेष आश्चर्य हुआ साथ ही ख़ुशी भी ।

     थोड़ी देर में मदुरै स्टेशन आ गया, स्टेशन पर उतरते ही बड़ी तेज बारिश शुरू हो गई , मैं और कुमार मदुरै के बाजार की ओर निकल पड़े , रात को धोके में कोई मेरी माँ की चप्पल पहन गया था रामेश्वरम के वेटिंग रूम में , बाकी सभी प्लेटफोर्म पर ही बैठे रहे बारिश के थमने के इंतजार में , मदुरै एक काफी अच्छा और साफ़ सुथरा शहर है, बाजार में सबकुछ समझ आ रहा था सिवाय दुकानों के नामों के , तमिल में जो लिखी थी , यहाँ सिटी बस की भी सेवा थी पर कहाँ जा रही थी नहीं पता, तमिल में जो लिखा था उनका रूट ।

    मैंने मीनाक्षी मंदिर का पता लगाया , स्टेशन से दो किलोमीटर दूर था , स्टेशन से एक ऑटो किराये पर किया और पहुँच गए मिनाक्षी मंदिर । यह मंदिर भी बहुत बड़ा और अत्यंत साफ़ स्वच्छ था , यहाँ हमें विदेशी पर्यटक भी देखने को मिले जो मीनाक्षी देवी के दर्शन को आये होंगे या फिर मंदिर को देखने । मीनाक्षी देवी पार्वती का ही एक रूप हैं, कहानी आपको विकिपीडिया से मिल जाएगी ।

    मंदिर से दर्शन करने के पश्चात् हमने एक रेस्टोरेंट में खाना खाया , केले के पत्ते के ऊपर , यानिकि नीचे थाली थी और उसमे केले का पत्ता था जिसपर दक्षिणी व्यंजन रखे थे जैसे चावल, साम्भर और भी बहुत कुछ , कुल मिलकर बड़ा ही स्वादिष्ट भोजन था । खाना खाकर मदुरै के बस स्टैंड की तरफ बढ़ चले , अजगरकोविल जाना था, यह मदुरै से 21 किमी दूर एक रमणीय स्थल है जहाँ पहाड़ों के नीचे एक सुन्दर अजगर कोविल जी का मंदिर बना है , अजगर कोविल विष्णु भगवान् का ही एक रूप हैं जो मिनाक्षी देवी के भाई कहलाते हैं ।

   मुझे यह स्थान बहुत ही सुन्दर लगा , मदुरै शहर से काफी दूर हरे भरे पहाड़ों के बीच एक शांत तीर्थ स्थान /

मंदिर के ऊपर पहाड़ पर एक झरना भी है जहाँ लोग नहाने के लिए भी जाते हैं, समयाभाव के कारण हम वहां नहीं जा पाए क्योंकि हमारा रिजर्वेशन था मदुरै से किला पैसेंजर में जो रात को ग्यारह बजे मदुरै से नागरकोइल होते हुए कोल्लम तक जाती है ।

   हम रात तक स्टेशन वापस आ गए, यहाँ मैंने एक खास चीज यह देखी कि यहाँ की सभी लड़कियां सलवार शूट में ही थी , किसी के भी मुँह से स्कार्फ नहीं बंधा था ,सभी एकदम सादा और सिंपल।न कोई जींस में थी और और नहीं किसी और लिबास में । कितना फर्क था उत्तर भारत की और दक्षिण भारत की लड़कियों में ।

उच्चिपुल्ली रेलवे स्टेशन 

तमिलनाडु का एक दृश्य 


मानामदुरै रेलवे स्टेशन 



मदुरै स्टेशन पर 


मदुरै जंक्शन रेलवे स्टेशन 

मीनाक्षी मंदिर की एक झलक 


मीनाक्षी मंदिर 



मीनाक्षी मंदिर ऐसे ही चार दरवाजे हैं 


अमृता रेस्टोरेंट , जहाँ हमने खाना खाया था 



अजगर कोविल मंदिर का प्रवेश द्वार 

अजगर कोविल मंदिर 


मैं और माँ , अजगर कोविल मंदिर में,




मेरे मातापिता , अजगर कोविल में,


अजगर कोविल जी मंदिर भी काफी बड़ा है , पीछे वो पहाड़ जिस पर झरना बहता है 


मंदिर के सामने एक कुंड 


अजगर कोविल का बस अड्डा 

मदुरै स्टेशन पर कुमार 


मदुरै रेलवे स्टेशन

यात्रा का अंतिम भाग -  कन्याकुमारी