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Friday, June 14, 2013

एटा पैसेंजर से एक यात्रा



एटा यात्रा 


    यूँ तो एटा आगरा के नजदीक ही है, दोनों में केवल 85 किमी का ही फासला है परन्तु मेरा एटा जाने का जब भी विचार बनता तो कोई न कोई अड़चन आ ही जाती थी और एटा जाने का विचार आगे के लिए खिसक जाता था । एटा के लिए रास्ता टूंडला होकर गया है , और टूंडला से ही एक रेलवे लाइन बरहन होकर एटा के लिए गई है , जिस पर दिन में एक ही पैसेंजर ट्रेन चलती है जो टूंडला से एटा के २ चक्कर लगाती है, मेरा इस रेलवे लाइन को देखने का बड़ा ही मन था, पर कभी मौका नहीं मिल पाया । 

     पिछली बार सर्दियों में एक बार मन बना भी था , सोआगरा कैंट स्टेशन पहुंचा, एक एटा की टिकट ली सत्रह रुपये की थी, आगरा से टूंडला के लिए सुबह आठ बजे एक ईएमयु शटल अलीगढ के लिए चलती है , आज वो शटल कैंसिल हो गयी , मैं स्टेशन से घर पहुंचा , मैंने अखबार में देख रखा था कि रेलवे कोहरे के वजह से कई ट्रेनों का संचालन 2 महीने के लिए बंद कर रही थी, इसमे एक नाम टूंडला - एटा पैसेंजर का भी था और आज इस ट्रेन का अंतिम दिन था, आज के बाद यह ट्रेन २ महीने के लिए छुट्टियों पर जा रही थी । 

   मैं बाइक उठाकर टूंडला पहुँच गया, यहाँ ट्रेन अभी एटा से आई नहीं थी, मैंने काफी देर तक ट्रेन की प्रतीक्षा की, परन्तु ट्रेन का समय बढ़ता ही जा रहा था , मैं वापस आगरा लौट गया , और इंतजार करने लगा अगली बार कभी एटा यात्रा करने का । 

   एटा में मेरे एक फूफाजी रहते हैं श्री ब्रजकिशोर उपाध्याय , पेशे से अपने समय में पटवारी रह चुके हैं जलेसर में ,काफी दिनों से मुझे याद कर रहे थे , कि मैं एक बार एटा घूम जाऊं। वैसे तो मेरा भी यही ख्वाब था पर आज फूफाजी ने मेरी एटा यात्रा को पक्का बना दिया था । हालांकि पूरे भारत में एटा के लिए सिर्फ एक ही ट्रेन है एटा - टूंडला पैसेंजर । मैं सुबह ५ बजे अपनी छोटी बहिन को साथ लेकर अपनी बाइक से टूंडला पहुंचा। पैसेंजर को चलने में अभी काफी समय था, मैंने अपना टिकट लिया और ट्रेन में आकर बैठ गया।  निधि को टिकट की जरुरत नहीं थी उसके पास भारतीय रेलवे का पास था । 

     ट्रेन मितावली, बरहन,  जलेसर सिटी , अवागढ़, वसुंधरा होते हुए ट्रेन एटा पहुँच गई, एटा एक टर्मिनल स्टेशन है जहाँ से आगे कोई रेलमार्ग नहीं है , अगर है तो पंद्रह किमी आगे कासगंज - कानपुर रेलमार्ग । एटा की रेलवे लाइन अंग्रेंजों के समय से ही ब्रौड गेज रही है, मेरे फूफाजी ने मुझे बताया की यहाँ से आज भी मालगाड़ी के जरिये माल भारत के विभिन्न राज्यों में पहुँचाया जाता है , अंग्रेजों ने भी इस रेल मार्ग को इसी कारण बनाया था ।

    यहाँ के लोग भी यही चाहते हैं कि रेलवे कासगंज और एटा के बीच जो पंद्रह किमी का फासला है उसे रेल मार्ग द्वारा जोड़ दे और एटा के लिए कुछ ट्रेने आगरा और दिल्ली के लिए भी चला दे , ताकि एटा का संपर्क भारत के अन्य बड़े शहरों से भी हो सके । 

   मैं और निधि ट्रेन से नीचे उतरे, यहाँ पर पहले से  बैठी सवारियों ने जो टूंडला जा रही थी अपनी सीट ग्रहण की । स्टेशन पर फूफाजी की फोन आया , कहने लगे - "" कहाँ हो लला ? मैंने कहा स्टेशन पर , उन्होंने उत्तर दिया - स्टेशन के बाहर वैन खड़ी है सफ़ेद रंग की, तायी में हम बैठे हैं चले आओ । मैं स्टेशन से बाहर निकला सामने मुझे फूफाजी खड़े नजर आये और हम मारुती वैन से उनके घर पहुंचे । मैं एक दिन एटा में फूफाजी के यहाँ रहा और दुसरे दिन बस से टूंडला वापस आ गया , और यहाँ से अपनी बाइक उठाई और आगरा पहुँच गया । 

        यूँ तो एटा में ऐसी कई चीज़ें थी जो देखने  थी , परन्तु रिश्तेदारी का मामला होने के वजह से मैं कहीं घूमने नहीं जा पाया , और समय की कमी के कारण मैं घूमने के लिए वहां नहीं रूक सका । फूफाजी ने बताया था कि एटा में एक कैलाश मंदिर है जो सबसे ऊँचे टीले पर बना है और शहर के बीचों बीच स्थित है , यहाँ एक नदरई का पुल है जो काली नहर के ऊपर बना है , मतलब नीचे एक नहर , फिर उसके ऊपर काली नहर और उसके ऊपर सड़क का पुल । है न कमाल का पुल, मैंने देखा तो नहीं था पर सुनकर बड़ा आश्चर्य हुआ , एटा करीब तीस किमी पहले अवागढ़ के नाम से एक किला भी है जो अवागढ़ कसबे थोड़ी दूर एक मैदानी भाग में बना है , त्न्दला से एटा जाते वक़्त रास्ते में एक बड़ी नहर भी पड़ती है जिसका नाम है हजारा नहर , यह अत्यन्य गहरी और सदा पूरे वेग से चलने वाली नहर है, कहते हैं यह गंगा नदी में से ही निकाली गयी है । 

मितावली रलवे स्टेशन 

बरहन जंक्शन रेलवे स्टेशन 

हावड़ा दिल्ली रेलमार्ग को छोड़कर ट्रेन एटा की तरफ जा रही है 

शिवालय टेहू 

शिवालय टेहू  रेलवे स्टेशन 

जलेसर सिटी रेलवे स्टेशन 

जलेसर सिटी स्टेशन 

जलेसर की एक इमारत 

जाहरपुर कमसान रेलवे स्टेशन 

जवाहरपुर कमसान का टिकट घर 

हजारा  नहर 



एटा रेलवे स्टेशन 

मेरे फूफाजी का घर 

 एटा की सबसे बड़ी चर्च