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Monday, October 23, 2017

RAJGIR STOOP


विश्व शांति स्तूप - राजगीर


जीवक का दवाखाना देखने के बाद हमारी घोड़ागाड़ी राजगीर के गिद्ध कूट पर्वत की तरफ बढ़ चली।  कहा जाता है कि यही वो पर्वत है जिस पर बैठकर महात्मा बुद्ध ने अपने शिष्यों को उपदेश दिया था। उन्ही की याद में यहाँ एक विशाल स्तूप का निर्माण कराया गया है जो राजगीर स्तूप के नाम से जाना जाता है, इसे विश्व शांति स्तूप भी कहते हैं। इस पिकनिक के लिए बेहद खूबसूरत स्थान है यहाँ स्तूप तक जाने के लिए रोपवे की व्यवस्था है यह रोपवे एक सीट का है इसलिए यह अन्य रोपवे से थोड़ा अलग और एडवेंचर लगता है। स्तूप के चारों तरफ महात्मा बुद्ध की मूर्तियां स्वर्णिम रूप में व्यवस्थित हैं। ऐसे स्तूप देश में अन्य जगहों पर भी हैं। कुछ देर मैं स्तूप के आसपास ही घूमता रहा की तभी रोपवे कंपनी का अनाउंस हुआ कि लंच का समय हो गया है रोपवे आधा एक घंटे के लिए बंद रहेगा, इसलिए जिसे जाना हो वो अभी  पहुँच सकते हैं। मैं ये सुनकर सीधे रोपवे तक पहुंचा और पहाड़ से नीचे की तरफ रवाना हो गया, रास्ते में अचनाक लाइट चली गई और रोपवे सेवा कुछ समय के लिए बंद हो गई,हम पहाड़ पर तारो के सहारे हवा में लटके हुए थे करीब पंद्रह मिनट बाद जब लाइट आई और मैं नीचे पहुंचा।

नीचे पहुंचकर मैंने टाँगे वाले बाबा को जगाया और वो मुझे लेकर वापस राजगीर पहुंचे। बाबा ने मुझे जहाँ उतरा वहीँ पास में ही वेणुवन था जो की बिम्बिसार ने महात्मा के ठहरने और रहने के लिए के लिए उन्हें भेंट किया। यह काफी बड़ा पार्क है जिसमे महात्मा बुद्ध की मूर्ति दर्शनीय है, यह एक ऐतिहासिक स्थान है जहाँ महात्मा बुद्ध ने अपने शिष्यों को उपदेश दिए थे।


राजगीर में 

































BIMBISAR JAIL



बिम्बिसार की जेल तथा जीवक का दवाखाना

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सोनभंडार से एक रास्ता जरासंध की रणभूमि की तरफ भी गया है जो यहाँ से 2 किमी की दूरी पर है। ताँगे वाले बाबा मुझे यहाँ नहीं लेकर गए और इसे बिना देखे ही मैं आगे नई मंजिल की तरफ बढ़ चला। गया मोकामा रोड पर कुछ किमी चलने के बाद बिम्बिसार की जेल आती है। कहा जाता है कि यही वो स्थान है जहाँ अजातशत्रु ने अपने पिता बिम्बिसार को कैद करके रखा था। यह स्थान स्वयं बिम्बिसार ने चयन किया था क्योंकि बिम्बिसार की महात्मा बुद्ध के प्रति विशेष आस्था थी और जहाँ यह जेल बानी थी उसके ठीक पीछे गिद्धकूट पर्वत है जिसपर महात्माबुद्ध अपने अनुयायियों के साथ निवास करते थे।

MANIYAR MATH


मनियार मठ 

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      जरादेवी मंदिर आगे चलकर सोन भंडार गुफा की तरफ जाते वक़्त रास्ते में मनियार मठ पड़ता है। यूँ तो यह आज एक बौद्धिक स्थल है परन्तु इसका इतिहास आजतक स्पष्ट नहीं हो सका है। जैन धर्म के अनुसार यह विदेह ( वैशाली ) की राजकुमारी और अजातशत्रु की माँ रानी चेलन्ना का कुंआ है जो उस समय में निर्माण कूप कहलाता है। इसका निर्माण गोलाकार ईंटों से हुआ है। कुछ ग्रंथों में इसे बुद्ध का स्तूप भी कहा जाता है परन्तु यह इसे देखने के बाद सच नहीं लगता क्योंकि इसकी सरंचना एक कुएँ के प्रकार की है और वास्तव में यह एक कुँआ ही है।

SAPTPARNI CAVE



वैभारगिरि पर्वत और सप्तपर्णी गुफा 

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ब्रह्मकुंड में स्नान करने के बाद मैं इसके पीछे बने पहाड़ पर चढ़ने लगा, यह राजगीर की पांच पहाड़ियों में से एक वैभारगिरि पर्वत है जिसे राजगीर पर्वत भी कहा जाता है। कहा जाता है कि इसी पर्वत पर वह ऐतिहासिक गुफा स्थित है जहाँ अजातशत्रु के समय प्रथम बौद्ध संगीति का आयोजन हुआ था। इसे सप्तपर्णी गुफा कहते हैं।
इसी के साथ ही यहाँ जैन सम्प्रदाय के कुछ पूजनीय मंदिर भी स्थित हैं। और इनके अलावा एक महादेव का मंदिर भी इस पर्वत स्थित है। इसप्रकार यह पर्वत तीनों धर्मो के लिए विशेष महत्त्व रखता है।

RAJGIR


   राजगीर या राजगृह - एक पर्यटन यात्रा 

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मेरी ट्रेन सुबह ही राजगीर पहुँच गई थी, जनरल कोच की ऊपर वाली सीट पर मैं सोया हुआ था, एक बिहारिन आंटी ने मुझे नींद से उठाकर बताया कि ट्रेन अपने आखिरी स्टेशन पर खड़ी है। मैं ट्रेन से नीचे उतरा तो देखा एक बहुत ही शांत और खूबसूरत जगह थी ये, सुबह सुबह राजगीर की हवा मुझे एक अलग ही एहसास दिला रही थी कि मैं रात के चकाचौंध कर देने वाले गया और पटना जैसे शहरों से अब काफी दूर आ चुका था। हर तरफ हरियाली और बड़ी बड़ी पहाड़ियाँ जिनके बीच राजगीर स्थित है। यूँ तो राजगीर का इतिहास बहुत ही शानदार रहा है, पाटलिपुत्र ( पटना ) से पूर्व मगध साम्राज्य की राजधानी गिरिबज्र या राजगृह ही थी जिसका कालान्तर में नाम राजगीर हो गया।