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Tuesday, February 27, 2018

ANYOUR


गोवर्धन परिकर्मा प्रथम चरण 
आन्यौर ग्राम स्थित श्रीनाथ का प्राकट्य स्थल और संकर्षण कुंड।

      अब मैं गोवर्धन पर्वत की तलहटी के बिलकुल नजदीक पहुँच गया था, मेरे दूसरी तरफ आन्यौर ग्राम था। यहाँ से एक रास्ता गोवर्धन पर्वत के ऊपर स्थित एक मंदिर को जाता है। मैं फिर से अपने जूते उतार कर गोवर्धन पर्वत पर चढ़ा और मंदिर पर पहुंचा। यहाँ मैंने गोवर्धन पर्वत के दूसरी तरफ देखा तो ये जतीपुरा था जो यहाँ से परिक्रमा मार्ग के अनुसार काफी दूर था। आन्यौर और  जतीपुरा के लोग पैदल के रूप में जाने जाने के लिए गोवर्धन पर्वत का इस्तेमाल करते हैं। इस मंदिर के बारे में अगले पोस्ट में जिक्र किया जायेगा।

Saturday, February 17, 2018

BAHULAVAN




बहुलावन - ग्राम बाटी 


       ब्रज के बारह वनो में से एक बहुलावन ब्रज का चौथा वन है जहाँ बहुला बिहारी के साथ साथ बहुला गौ माता के दर्शन हैं। मथुरा से आठ किमी दूर स्थित ग्राम बाटी में स्थित  ब्रज का पौराणिक स्थल बहुलावन अत्यंत ही प्राकृतिक और ब्रज की धार्मिक धरोहर के रूप में व्यवस्थित है। यहाँ भगवान् श्री कृष्ण ने बहुला गाय की बाघ से रक्षा की थी। इसकी कथा निम्नप्रकार है -

Thursday, February 8, 2018

DAANGATHI



गिर्राज धाम श्री गोवर्धन पर्वत
गोवर्धन परिक्रमा 1  -  दानघाटी मंदिर और दानीराय जी का मंदिर 



        आज कंपनी का इवेंट फिर से गोवर्धन में लगा। इवेंट में हरेंद्र को बैठकर मैं गिर्राज जी के दर्शन को पैदल ही निकल पड़ा। दानघाटी के दर्शन करते हुए मैं गोवर्धन परिक्रमा मार्ग पर निकल पड़ा ब्रज की उस अनमोल धरोहर को देखने,  जिसके लिए देश के कोने कोने से लाखों भक्त हर दिन यहाँ आते हैं और कठिन परिस्थिति में भी गोवर्धन पर्वत की 21 किमी की परिक्रमा पैदल पूरी करते हैं। गोवर्धन पर्वत की कथा भी कम रोचक नहीं है गोवर्धन पर्वत ने बड़ी चतुराई से स्वयं को ब्रज में स्थापित किया था।

Thursday, October 12, 2017

RADHAKUND



 राधाकुंड मेला - अहोई अष्टमी की एक रात


       माना जाता है कि अहोई अष्टमी की मध्य रात्रि को राधाकुंड में स्नान किया जाये तो एक वर्ष के अंदर संतान प्राप्ति का सुख निश्चित प्राप्त होता है। कृष्ण पक्ष की अष्टमी को मध्य रात्रि राधाकुंड में स्नान करने का पौराणिक महत्त्व है इस दिन ब्रज की अधिष्ठात्री देवी श्री राधारानी इस कुंड में एक साथ स्नान करने वाले भक्तो को संतान प्राप्ति का फल देती हैं और साल भर के भीतर उनके यहाँ संतान जन्म लेती है। इस दिन गोवर्धन मथुरा स्थित राधाकुंड में विशाल मेला लगता है। राधाकुंड का निर्माण स्वयं भगवान कृष्ण ने अपनी बांसुरी की नोक से खोदकर किया था जब उन्होंने बछड़े का रूप लेकर आये महादैत्य अरिष्टासुर का वध किया था जिससे उन्हें गोहत्या का पाप लगा। राधारानी के कहने पर इस पाप से मुक्ति पाने के भगवान कृष्ण ने सभी तीर्थों का जल राधाकुंड में मिलकर उसमे स्नान किया और गोहत्या के पाप से मुक्ति पाई साथ ही राधारानी को यह वरदान दिया कि कृष्ण पक्ष की अष्टमी की मध्य रात्रि जो भी इस कुंड में स्नान करेगा उसे संतान की प्राप्ति अवश्य होगी।

Saturday, October 7, 2017

PAGALBABA TAMPLE


पागलबाबा मंदिर 



     मेरी माँ बचपन से ही हर अमावस्या को श्री ठाकुर जी के दर्शन करने आगरा से वृन्दावन जाती थीं, मथुरा से वृन्दावन जाते समय एक बहुमंजिला मंदिर पड़ता था जिसे देखकर मैं माँ से पूछता था कि माँ यह मंदिर किसका है, माँ जवाब दे देती थी पागल बाबा का। भच्पन बहुत ही चंचल होता है जानने की बड़ी  इच्छा होती थी कि  इन्हे पागलबाबा क्यों कहते हैं।  धीरे धीरे समय गुजर गया और मैं बड़ा हो गया, आज जब ठाकुरजी की कृपा से अपना आशियाना और नौकरी ब्रज में ही है तो क्विड लेकर मांट से सीधे कालिंदी के किनारे पहुँचा एक पीपों से बने हुए पल को पारकर मैं वृन्दावन पहुँचा और मथुरा रोड पर स्थित पागलबाबा के दर्शन किये।  और वहां जाकर जाना कि पागलबाबा कौन थे। गूगल पर जाकर आपको इनकी कहानी पढ़ने को मिल जाएगी। हम तो घुम्मकड़ हैं बस अपनी यात्रा का विवरण ही दे सकते हैं। 

Sunday, October 1, 2017

BALDEV




दाऊजी मंदिर - बलदेव धाम 


यूँ तो मथुरा को भगवान कृष्ण और राधा की लीलास्थली के रूप में जाना जाता है किन्तु भगवान श्री कृष्ण के बड़े भाई बलभद्र जी भी थे जो कि शेषनाग के अवतार थे। कृष्ण जी उन्हें बड़े प्यार से दाऊ भईया कह कर पुकारते थे। त्रेतायुग में भगवान् राम के छोटे भाई लक्ष्मण के रूप में शेषनाग जी ने अवतार लिया था और द्वापर युग में बलभद्र के रूप ये देवकी की सातवीं संतान थे जो संकर्षण के जरिये बसुदेव जी की दूसरी पत्नी रोहिणी के गर्भ से जन्मे थे जिस कारन इन्हे संकर्षण भगवान भी कहा जाता है। मथुरा से सादाबाद मार्ग पर 20  किमी आगे बलदेव नामक स्थान जहाँ दाऊजी का विशाल मंदिर है। यहाँ दूर दूर से काफी संख्या में लोग दाऊजी के दर्शन करने आते हैं।

Friday, September 29, 2017

KUSUM SAROVER


गोवर्धन परिक्रमा एवं कुसुम सरोवर

       अभी कुछ ही दिनों पहले मेरी कंपनी का गोवर्धन क्षेत्र में एक इवेंट लगा जिसकी मुनियादी गोवेर्धन क्षेत्र के आसपास कराई जानी थी जिसकी जिम्मेदारी मुझे सौंपी गई। मैंने एक टिर्री बुक की,  जिसमे स्पलेंडर बाइक फिट थी और पीछे आठ दस सवारियों के बैठने की जगह थी। इस टिर्री के साथ मैंने मुनियादी करने  के लिए  गोवर्धन परिक्रमा क्षेत्र को चुना। मौसम आज सुहावना था, सुबह सुबह खूब तेज बारिश पड़ी इसलिए मौसम में काफी ठंडक भी थी। गोवर्धन का परिक्रमा मार्ग कुल 21 किमी का है जो  दो भागों में विभाजित है बड़ी परिक्रमा और छोटी परिक्रमा। बड़ी परिक्रमा कुल चार कोस की है, मतलब 12 किमी और छोटी 3 कोस की मतलब 9 किमी की।

        गोवर्धन के मुख्य मंदिर दानघाटी से परिक्रमा शुरू होती है जो आन्यौर होती हुई राजस्थान की सीमा में प्रवेश करती है जहाँ पौराणिक पूँछरी के लौठा का मुख्य मंदिर है। यह गोवर्धन पर्वत का अंतिम स्थल है इसके बाद परिक्रमा पर्वत के दूसरी तरफ वापस दानघाटी की तरफ मुड़ जाती है जो जतीपुरा होते हुए वापस गोवर्धन जाती है। यह 12 किमी की बड़ी परिक्रमा है, यहाँ से अब छोटी परिक्रमा शुरू होती है जो गोवर्धन के बड़े बाजार से होती हुई राधाकुंड पहुंचती है। राधाकुंड से आगे कुसुम सरोवर के नाम से एक पौराणिक स्थल है जो अत्यंत ही खूबसूरत है।

कुसुम सरोवर से सीधे हम वापस गोवर्धन पहुंचते हैं , यह परिक्रमा इन्फिनिटी के डिज़ाइन की तरह है, गोवर्धन परिक्रमा के दौरान अनेको छोटे और बड़े मंदिर  पड़ते हैं जो कि दर्शनीय हैं।


गोवर्धन का एक मंदिर 

ऋणमोचन कुंड 

मानसी गंगा द्धार 

गोवर्धन 

जय गिर्राज जी महाराज 



दानघाटी मंदिर 




पूँछरी का लौठा , गोवर्धन, राजस्थान 





रूद्र कुंड 


चूतड़ टेका , एक विश्राम स्थल 

कुसुम सरोवर 

कुसुम सरोवर 

कुसुम सरोवर 

टिर्री वाला भाई 




प्राचीन कुंआ , कुसुम सरोवर 




जपाकर शर्मा , सिद्ध यात्री निवास होटल के डायरेक्टर 
  

Monday, September 18, 2017

SHANTANU KUND




शांतनु कुंड -  एक पौराणिक स्थल , सतोहा 


         भगवान श्री कृष्ण की ब्रजभूमि में ऐसे कई स्थान हैं जिनका सीधा सम्बन्ध या तो इतिहास से है और सर्वाधिक पुराणों से है। मैंने सभी पुराण तो नहीं पढ़े हैं परन्तु रामायण और श्रीमद भागवत का अध्ययन और श्रवण कई बार किया है, इसलिए मुझे उन स्थानों पर जाने और उन्हें देखने में विशेष रूचि है। आज ऐसे ही एक स्थान पर मैं कंपनी की गाडी क्विड से नीरज के साथ मथुरा के सतोहा ग्राम में पहुंचा जहाँ एक पौराणिक कुंड ब्रज की अनमोल धरोहर है। इस कुंड का नाम महाभारत युद्ध से पूर्व हिस्तनापुर के सम्राट महाराज शांतनु के नाम पर है। माना जाता है कि महाराज शांतनु ने इस स्थान पर रहकर तपस्या की थी।

Sunday, September 3, 2017

RAM TAL




रामताल - एक पौराणिक स्थल 



        अभी कुछ ही दिनों पहले सुर्खियों में एक खबर आई थी कि वृन्दावन के सुनरख गाँव के पास एक कुंड मिला है जिसका नाम रामताल है , बताया जाता है कि ये 2500 बर्ष से भी पुराना है और उसी समय की काफी वस्तुएं भी पुरातत्व विभाग को वहां खुदाई के दौरान मिली। पुरातत्व विभाग ने यहाँ उत्खनन सन 2016 में शुरू कराया तो एक प्राचीन और पौराणिक धरोहर के रूप में रामताल को जमीन के अंदर पाया। यह खबर सुनकर मेरा मन भी बैचैन हो उठा और आखिरकार मैं भी रामताल देखने निकल पड़ा।  हालाँकि ड्यूटी पर ही था किसी काम से कंपनी की गाडी लेकर मैं और नीरज वृन्दावन आये और यहीं से हम रामताल पहुंचे।

Saturday, September 2, 2017

KANS FORT


कंस किला और वेदव्यास जी का जन्मस्थान


कई बार सुना था कि मथुरा में कहीं कंस किला है, पर देखा नहीं था। आज इरादा बना लिया था कि जो चाहे हो देखकर रहूँगा। मैं अपनी बाइक से मथुरा परिक्रमा मार्ग पर गया और पाया कि आज ब्रज की अनमोल धरोहरों का आज मैं अकेला अवलोकन कर रहा हूँ। सबसे पहले मेरी बाइक चक्रतीर्थ पहुंची जहाँ भगवान शिव् का भद्रेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन हुए और मंदिर के ठीक सामने चक्रतीर्थ स्थित है।  इसके बाद कृष्ण द्वैपायन भगवान वेदव्यास जी की जन्मस्थली पहुंचा। यहाँ भी सुन्दर घाट बने हुए थे पर अफ़सोस यमुना यहाँ से भी काफी दूर चली गई थी और यमुना में से निकली एक नहर इन घाटों को छूकर निकल रही थी।

Saturday, July 15, 2017

RASKHAN TOMB



रसखान समाधि 

महावन घूमने के बाद रमणरेती की तरफ आगे ही बढ़ा था कि रास्ते में एक बोर्ड लगा दिखाई दिया, और उसी बोर्ड की लोकेशन पर मैं भी चल दिया। आज मेरी गाडी घने जंगलों के बीच से निकलकर उस महान इंसान की समाधि पर आकर रुकी जिनके नाम को हम इतिहास में ही नहीं बल्कि अपनी हिंदी की किताब में भी बचपन से पढ़ते आ रहे थे और वो थे कृष्ण भक्त रसखान। आज यहाँ एकांत में रसखान जी की समाधी देखकर थोड़ा दुःख तो हुआ पर ख़ुशी भी हुई कि आज एक ऐसे भक्त के पास आया हूँ जिसने मुसलमान होते हुए भी भगवन कृष्ण की वो भक्ति पाई जो शायद कोई दूसरा नहीं पा सका। 

MAHAVAN




महावन - पुराना गोकुल 


यूँ तो मथुरा में रहते हुए काफी समय हो गया था पर अपना शहर घूमने का कभी वक़्त ही नहीं मिला, आज मिला तो गोकुल की तरफ निकल गया। गोकुल बैराज से उतरते ही जो गोकुल दिखाई देता है वो नया बसा हुआ गोकुल है पर कहा जाता है महावन स्थित गोकुल ही असली और पुराना गोकुल है। इसलिए मैं भी अपनी बाइक से महावन गया और हर उस स्थान को देखा जो भगवान श्री कृष्ण की लीलास्थलियों से जुड़ा है आइये आपको भी उन स्थानों का भ्रमण कराता हूँ। 

Sunday, February 26, 2017

KOKILAVAN



श्री शनिदेव धाम - कोकिलावन 


       आज शनिवार है और 25 फरवरी भी। आज मेरी ऑफिस की छुट्टी थी और कल मेरी शादी की सालगिरह थी इसलिए कल तो कहीं जा न सका पर आज की इस छुट्टी को बेकार नहीं जाने देना चाहता था।  ने और मैंने श्री राधारानी के दरबार में जाने का विचार बनाया और हम चल दिए अपनी एवेंजर बाइक लेकर ब्रज की एक अनोखी सैर पर।

      सबसे पहले हम माँ नरी सेमरी के द्वार पहुंचे, यह ब्रज की कुलदेवी हैं और नगरकोट वाली माँ का ही दूसरा रूप हैं यह यहाँ कैसे पधारीं इसका वरन आपको जल्द ही अगले  जानने को मिल जायेगा। यहाँ आगे सैम सीधे कोसीकलां पहुंचे यह उत्तर प्रदेश और हरियाणा की सीमा पर स्थित मथुरा जनपद का आखिरी क़स्बा है यहीं से एक रास्ता कोकिलावन, नंदगाँव, बरसाना  होते हुए गोवर्धन को जाता है।

Monday, November 28, 2016

BRAHMAND GHAT



ब्रह्माण्डघाट

       गोकुल के नजदीक ही यमुना नदी के किनारे यह घाट स्थित है । कहते हैं यह वही स्थान है जहाँ भगवान श्री कृष्ण ने बचपन में माटी खाई थी, उन्हें माटी खाते देख माँ यशोदा उन्हें मुँह खोलने को कहती हैं तो श्री कृष्ण के छोटे से मुख में सारा ब्रह्माण्ड देख आश्चर्य चकित रह जाती हैं ।