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Friday, November 21, 2014

NAINA DEVI



 माँ नैनादेवी के दरबार में 

     हिमालय के हरे भरे जंगलों और पहाड़ों में चढ़ाई चढ़ने के बाद हमारी बस नैनादेवी पहुंची। यह नौदेवियों और 51 शक्तिपीठों में से एक हैं। कहा  जाता है की यहाँ सती की बाई आँख गिरी थी जिससे इस स्थान को शक्तिपीठों में गिना जाता है। मुख्य बाजार से सीढ़ियों के रास्ते हम मंदिर पहुंचे। मंदिर ऊंचाई पर होने के साथ साथ काफी सुन्दर बना है और हिमालय की खूबसूरत वादियां और दृश्यावलियां यहाँ से बखूबी दिखाई देती हैं।मंदिर का प्रांगण काफी बड़ा बना हुआ है और यहाँ एक ब्रिज है जो अत्यधिक भीड़ होने की स्थिति में माँ के दर्शन करने के लिए काफी राहत देता है। पिछले कुछ दिनों पहले इसी ब्रिज पर भगदड़ मच जाने के कारण यहाँ काफी बड़ी दुर्घटना घटित हो गई थी जिसमे कुछ श्रद्धालुओं को अपनी जान गँवानी पड़ी थी।

       माता के दर्शन करने के बाद हम मंदिर के पिछले भाग में गए,  यहाँ एक लंगर भवन है जहाँ प्रतिदिन दर्शनार्थियों के लिए निःशुल्क भोजन की व्यवस्था है। हमने भी इसी लंगर भवन में भोजन पाया यह बहुत ही स्वादिष्ट और उत्तम था। भोजन करने के बाद हम हम यहाँ बानी एक गुफा के दर्शन करने भी गए पर तब तक यह बंद हो चुकी थी जिस कारण हम इसे नहीं देख पाए। सीढ़ियों के रास्ते हम वापस बस स्टैंड पहुंचे और आनंदपुर साहिब की बस पकड़ कर आंनदपुर साहिब की तरफ रवाना हो लिए। अब बस हिमाचल से पंजाब राज्य की तरफ जा रही थी जिस कारण पहाड़ी क्षेत्र समाप्त हो चूका था और माँ नैनादेवी का मंदिर अभी भी हमें यहाँ से साफ़ दिखाई दे रहा था।

       आनंदपुर साहिब एक शांत और साफ़ स्वच्छ  छोटा सा शहर है यहाँ एक विशाल गुरुद्वारा है जहाँ हम समयभाव के कारण नहीं जा पाए और रेलवे स्टेशन आकर ट्रैन की प्रतीक्षा में बैठे रहे। मेरा रेलवे का टेस्ट था  मैंने कल्पना से कहाकि अगर मैं टेस्ट में पास हो जाता हूँ और मुझे रेलसेवा का अवसर मिलता है तो मैं इसी स्टेशन पर नौकरी करना चाहूंगा , क्योकि यहाँ का शांत वातावरण और प्राकृतिक छटा मुझे काफी अतिप्रिय लगी और यहाँ से दूर पहाड़ पर बैठी माँ नैनादेवी के दर्शन भी रोज रोज करने को मिलेंगे। कल्पना ने कुछ नहीं कहा और चुपचाप मेरे लिए मूंगफली नुकाती रही। शाम को छ बजे के लगभग एक शटल आई और हम अम्बाला की तरफ फिर से रवाना हो लिए।






जय माँ नैनादेवी जी 

माँ नैनादेवी जी दरबार, हिमाचल प्रदेश 


आनंदपुर साहिब स्टेशन पर कल्पना 

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