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Sunday, June 23, 2013

AMRITSAR




अमृतसर रेलवे स्टेशन

होशियारपुर से हम जालंधर पहुँच गए, यहाँ से हमें अमृतसर की तरफ जाना था , तभी अलाउंस हुआ कि अमृतसर जाने वाली हीराकुंड एक्सप्रेस कुछ ही समय में प्लेटफोर्म एक पर आ रही है। मैं और कुमार टिकट लेने पहुंचे , मुझे तो टिकट मिल गई परन्तु  कुमार टिकट लेता ही रह गया, मेरे पहुंचते ही ट्रेन चल दी और कुमार प्लेटफोर्म पर ट्रेन को अपने सामने जाते हुए देखता ही रह गया, खैर बाद में आ जायेगा। ट्रेन का जनरल डिब्बा एकदम खाली था , वर्ना आगरा में तो इस ट्रेन के जनरल डिब्बे में बैठने की तो क्या खड़े होने की भी जगह नहीं मिलती।

व्यास नदी पार करके ट्रेन कुछ ही समय में अमृतसर पहुँच गई , अमृतसर के स्टेशन का एक अलग ही इतिहास रहा है। यहाँ से आगे एक डीएमयू  अटारी तक भी जाती है जो भारत की सीमा का आखिरी स्टेशन है, इसके बाद रेल लाइन पाकिस्तान में प्रवेश करती है जहाँ का पहला स्टेशन वाघा है।

 मैंने एक पंखे के नीचे अपना बिस्तर लगाया और प्लेटफोर्म पर ही सो गया और साथ में मेरे साथ आये सभी लोग भी। सुबह उठकर मैंने पहले वो जगह देखी जहाँ ग़दर मूवीज की शूटिंग हुई थी , उसके बाद स्टेशन पर बने वेटिंग रूम के बाथरूम में स्नान किया। यहाँ मेरा एक दोस्त रहता है नाम है सर्वेश भरद्वाज मैंने उसे फोन लगाया तो वह हमें स्टेशन लेने आ गया। वह स्टेशन के ठीक सामने एक होटल में अपने स्टाफ के साथ रहता है , उसने होटल में अपने कमरे के साथ साथ एक दूसरा कमरा भी हमारे लिए बुक कर रखा था, कुछ समय हमने होटल में बिताया और चल दिए स्वर्ण मंदिर की ओर।

सबसे पहले हमने जलियाँ वाला बाग़ देखा , जिसका इतिहास बड़ा ही दुखभर रहा है ,  पहले इसी बाग़ में अनगिनत बेक़सूर लोगों पर अनाधुन्ध गोलियां चलाई गई थी जिसमे हजारों की संख्या में लोग मारे गए थे,  यह ब्रिटिश सरकार का एक क्रूर और निंदनीय कार्य था,  तभी से इस घटना को जलियाँ वाला बाग़ हत्याकांड के नाम से जाना जाता है।

 आज मैं उस जगह खड़ा था जहाँ कभी मेरे जैसे जाने कितने अनगिनत और असावधान भाइयों और बहिनों को अंग्रेजी सरकार ने अपनी गोलियों का निशाना बनाया था, उनकी गोलियों के निशान आज भी जलियाँ वाला बाग़ की दीवारों में देखने को मिलते हैं। यहाँ एक कुआँ भी है जिसे शहीदी कुआँ कहते हैं, गोलियों से बचने के लिए हिंदुस्तानी जनता ने इस कुंए में छलांग लगा दी , बाद में इस कुंए से एक सौ बीस शव बाहर निकाले गए।

जलियाँ वाला बाग़ के बाद हम स्वर्ण मंदिर पहुंचे , यहाँ बहुत अत्यधिक भीड़ थी जो हमेशा रहती है , स्वर्ण मंदिर को आज मैंने पहली बार साक्षात देखा था, वाकई इसकी शोभा अतुलनीय है। यह सिख सम्प्रदाय का महत्वपूर्ण स्थल है, इसे हरमिंदर साहब का मंदिर भी कहा जाता है।

यहाँ हरवक्त लंगर चलता रहता है, सर्वेश और कुमार के साथ साथ मैंने भी लंगर में प्रसाद ग्रहण किया , और फिर अमृतसर घुमते हुए एक रेस्टुरेंट पर पहुंचे। यहाँ सभी ने खाना खाया जिसका बिल सर्वेश ने चुकाया ।
यहाँ एक और गोल्डन टेम्पल है जो हिन्दू सम्प्रदाय को समर्पित है, नाम है दुर्गियाना मंदिर। यह हुबहू स्वर्ण मंदिर की तर्ज पर बनाया गया है । इसकी शोभा भी देखने के लायक है ।

दुर्गियाना मंदिर  के साथ साथ यहाँ एक लालदेवी जी के नाम का एक बहुत बड़ा और बहुत ही शानदार मंदिर है , जिसमे सभी तीर्थ स्थानों और देवी देवताओं की मूर्तियाँ देखने में बड़ी शोभायमान लगती हैं, यहाँ एक वैष्णो देवी जी मंदिर भी है , इस मंदिर के बाद हमन छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस पकड़ ली और अमृतसर से रवाना हो लिए।

अमृतसर के मुख्य दर्शनीय स्थल

  • हरमंदिर साहब मंदिर ( स्वर्ण मंदिर )
  • जलियाँ वाला बाग़ 
  • दुर्गियाना मंदिर 
  • लालजी देवी मंदिर 
  • राम तीर्थ 
  • वाघा बॉर्डर 

अमृतसर स्टेशन रात के वक़्त 

अमृतसर रेलवे स्टेशन 

अमृतसर पर जननायक एक्सप्रेस 


जलियाँ वाला बाग़ 

एक मात्र प्रवेश द्वार 

सर्वेश भारद्वाज

शहीदों को नमन 

शहीदी कुआँ 

दीवारों में गोलियों के निशान


इसी स्थान पर हिंदुस्तानी जनता बैठी हुई थी 




जो बोले सो निहाल 

स्वर्ण मंदिर में लंगर भवन 

सर्वेश भारद्वाज

स्वरण मंदिर में हम 

स्वर्ण मंदिर 
दुर्गियाना मंदिर *

खालसा कॉलेज *

राम तीर्थ *


लालजी देवी मंदिर में महात्मा बुद्ध की एक प्रतिमा 


ब्रह्मा जी 

लालजी देवी 

हीराकुंड एक्सप्रेस में एक सफ़र 

* उपरोक्त चित्र विषय की उपयोगिता को देखते हुए गूगल से लिए गए हैं ।