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Thursday, April 13, 2017

DWARIKA



भेंट द्धारिका की तरफ 


          सही पांच बजे ट्रेन जयपुर से प्रस्थान कर चुकी थी। फुलेरा, अजमेर , मारवाड़, आबू रोड, मेहसाणा होते हुए ट्रेन सुबह कणकोट नामक स्टेशन पर आकर खड़ी हो गई। मैंने पहली बार गुजरात में कदम रखा था, यहाँ से मेरी गुजरात दर्शन की यात्रा शुरू हुई, राजकोट स्टेशन यहाँ का मुख्य डिवीज़न है, राजकोट स्टेशन पर काफी देर का स्टॉप था इसलिए मैं कुछ खाने के लिए स्टेशन पर उतर गया, यहाँ का मुख्य नाश्ता ढोकला है जिसकी  अधिकतर यात्री खरीददारी कर रहे थे। स्टेशन के बाहर एक स्टीम इंजन भी रखा हुआ था। 

          राजकोट से आगे अगला स्टॉप हापा था यहाँ ट्रैन कुछ ज्यादा ही देर रुकी रही और मुझे स्टेशन के फोटो खींचने का मौका मिल गया, हापा से आगे अगला स्टेशन जामनगर पड़ता है और जामनगर से आगे मुख्य स्टेशन द्धारिका ही है।  श्री द्धारिका धीश जी का मंदिर स्टेशन आने से पहले ही दूर से ट्रेन में दे दिखाई देता है और उनकी द्धारिका नगरी भी दिखाई देती है। द्धारिका के नाम से ही काफी शानदार रेलवे स्टेशन बना हुआ है जितने भी तीर्थयात्री हमारे साथ द्धारिका  आये थे वे सभी यहीं उतर गए और ट्रेन एकदम खाली हो चुकी थी। परन्तु मेरे रूट के अनुसार हमें द्धारिका से पहले भेंट द्धारिका जाना था और वहां जाने के लिए नजदीकी और आखिरी स्टेशन ओखा था। भारत के कोने कोने से द्धारिका आने वाली ट्रेनों का आखिरी स्टेशन ओखा है, इससे आगे जाने के लिए अब भूमि नहीं बची थी, था तो सिर्फ अथाह सागर और चारों तरफ नीले आसमान के नीचे नीला समुद्री जल।

Wednesday, April 12, 2017

DWARIKA

द्धारिका यात्रा 

पहला पड़ाव - जयपुर 

           चार धामों में से एक और सप्तपुरियों में से भी एक भगवान श्री कृष्ण की पावन नगरी द्धारिका की यह मेरी पहली यात्रा थी जिसमे मेरे साथ मेरी माँ, मेरी छोटी बहिन निधि, मेरी बुआजी बीना और मेरे पड़ोस में रहने वाले भाईसाहब और उनकी फेमिली थी।  मैंने जयपुर - ओखा साप्ताहिक एक्सप्रेस में रिजर्वेशन करवाया था इसलिए हमें यह यात्रा जयपुर से शुरू करनी थी और उसके लिए जरूरी था जयपुर तक पहुँचना।

            हमारे पड़ोस में रहने वाले एक  भाईसाहब अपनी जायलो से हमें मुड़ेसी रामपुर स्टेशन तक छोड़ गए यहाँ से हमें मथुरा - बयाना पैसेंजर मिली जिससे हम भरतपुर उतर गए।  भरतपुर से जयपुर तक हमारा रिजर्वेशन मरुधर एक्सप्रेस में था जो आज 2 घंटे की देरी से चल रही थी ,चूँकि पिछली पोस्ट में भी मैंने बताया था कि भरतपुर एक साफ़ सुथरा और प्राकृतिक वातावरण से भरपूर स्टेशन है।  यहाँ का केवलादेव पक्षी विहार पर्यटन क्षेत्र में अपना महत्वपूर्ण स्थान रखता है जहाँ आपको दूर देशों के पक्षी भी विचरण करते हुए देखने को मिलते हैं,|इसी की एक झलक भरतपुर स्टेशन की दीवारों पर चित्रकारी के माध्यम से हमें देखने को मिलती है।