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Monday, February 1, 2016

GONDA-PILIBHIT TRAIN

                                                   


                                                   गोंडा - पीलीभीत पैसेंजर ट्रेन यात्रा


नानपारा से हम मैलानी ओर चल दिए,  यह सफर मीटर गेज ट्रेन का एक अदभुत सफर है जो सरयू नदी के ऊपर बने बाँध के किनारे होता हुआ नेपाल की तराई में दुधवा नेशनल पार्क के बीच से होकर गुजरता है । मेरी बचपन की पसंदीदा ट्रेन गोकुल एक्सप्रेस इसी रास्ते से होकर गोंडा आगरा फोर्ट पहुंचती थी और आज यह ट्रेन केवल पीलीभीत तक ही सीमित है क्योंकि पीलीभीत से आगे की लाइन अब ब्रॉड गेज  कन्वर्ट हो चुकी है जल्द ही यह ट्रेन गोंडा से मैलानी रह जाएगी ।

भले ही यह लाइन एक दिन ब्रॉड गेज में परिवर्तित करदी जाएगी परंतु इस लाइन पर सफर का जो मजा मीटर गेज की ट्रैन में है वो ब्रॉड गेज की ट्रैन में नहीं रहेगा । इससे पहले मैं कासगंज से मैलानी होते हुए ऐशबाग ( लखनऊ) तक का सफर रुहेलखंड एक्सप्रेस से कर चूका हूँ तब मन में इस लाइन पर यात्रा करने की तीव्र इच्छा थी जो आज जाकर पूरी हुई । ट्रैन रायबोझा, मिहींपुरवा, मुर्तिहा, निशानगाड़ा, बिछिया होते हुए मझरा पूरब स्टेशन पहुँची ।   यह  स्टेशन  सरयू ( घाघरा ) नदी पर बने बाँध के समीप ही स्थित है , इस बाँध के कारण नेपाल के तराई की कई एकड़ भूमि जलमग्न है । मझरा  पूरब के बाद खैरटिया बाँध रोड के नाम से एक हाल्ट स्टेशन आया ,इससे ज्ञात होता है कि इस  बाँध का नाम खैरटिया ही होगा जो लखीमपुर जिले और नेपाल की सीमा पर स्थित है ।

नानपारा स्टेशन 

RAIBHOJHA

RAIBOJHA RAILWAY STATION




























तिकुनियां , बेलरायां होते हुए ट्रेन अब दुधवा राष्ट्रीय पार्क के घने जंगलों के बीच होकर गुजर रही थी ।रेलवे लाइन से थोड़ी दूरी पर राष्ट्रीय पार्क की सड़क भी थी । दुधवा रेलवे स्टेशन एक छोटा और घने जंगलों के बीच स्थित रेलवे स्टेशन है । दुधवा के बाद पलियां कलां होते हुए ट्रेन मैलानी पहुंची । यहाँ मेरी मीटर गेज यात्रा समाप्त हो गई क्योंकि मैलानी से पीलीभीत वाली लाइन पर मैं पहले भी सफर कर चूका था जो "रुहेलखंड एक्सप्रेस से एक सफर" वाले ब्लॉग में आपको देखने को मिल सकता है । हालाँकि अभी एक एक्सप्रेस भी पीलीभीत जाने के लिए आ रही थी पर हमने अपनी इसी पैसेंजर ट्रैन से अपनी यात्रा पीलीभीत तक पूरी की ।
पीलीभीत से रात को हम बरेली पहुंचे और बरेली से बस पकड़कर कासगंज । कासगंज से सुबह ४ बजे अछनेरा पैसेंजर तैयार खड़ी थी जिसमे मथुरा तक मैंने  कृष्णा ने अपनी नींद पूरी की और सुबह मथुरा उतर गया , कृष्णा का गांव मथुरा से एक स्टेशन आगे था , जिसके स्टेशन का नाम था भैंसा