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Friday, June 21, 2013

TEDA MANDIR

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टेड़ा मंदिर 


   काँगड़ा का किला देखकर हम वापस आये, होटल पर सब तैयार मिले,  मैंने जल्दी से होटल का चेकआउट कराया और नगरकोट धाम से ज्वालादेवी जी की ओर प्रस्थान किया । हमें हिमाचल की रोडवेज की एक बस मिल गई और हम ज्वालादेवी की तरफ चल दिए। यहाँ गंगादशहरा के अवसर पर  रास्ते में एक स्थान पर चने और सरवत का मुफ्त वितरण चल रहा था , इसलिए प्रत्येक बस पांच मिनट के लिए रुक रही थी , इसके बाद हम ज्वालादेवी पहुंचे, पहुँच कर होटल में कमरा तलाश किया, बड़े ही महंगे थे , पिछलीबार डेढ़ सौ रुपये  में जिस होटल में कमरा मिल गया था आज वो पांच सौ रुपये मांग रहा था । बड़ी मुश्किल से पांच सौ रुपये में दो अलग अलग रूम मिल गए, चौधरी गेस्ट हाउस में ।

   कमरा मिलने के बाद मैं बाजार घूमने चला गया और फिर लौटकर बाबा , कुमार और उसकी बहिन व् बुआ के साथ लंगर खाने गया । कुमार की एक अच्छी बात यह है कि वो बड़ा ही नेक इंसान है, उसमे मुझे बुराई देखने को भी नहीं मिलती , पर आज उसने मेरा दिल तोड़ दिया । ज्वालादेवी के मंदिर से ठीक तीन किमी ऊपर घने पहाड़ो के बीच एक मंदिर है, जिसका नाम है टेडा मंदिर । यह मंदिर एक तरफ से झुका हुआ है , देखने में टेडा ही नजर आता है इसलिए इसका नाम है टेडा मंदिर ।

   मैंने कुमार से अपने साथ टेडा मंदिर चलने के लिए कहा, तेज धूप और गर्मी को देखते हुए कुमार ने मेरे साथ चलने से मना कर दिया , बाबा भी मेरा साथ छोड़ चुके थे और शेष रहीं कुमार की बुआ और बहिन तो उन्हें मैं अपने साथ ले जाना नहीं चाहता था । इसलिए चल दिया अकेला ही टेडा मंदिर की ओर । रास्ते में सबसे पहले तारारानी का मंदिर आया , यह ज्वालादेवी के मंदिर से स्पष्ट दिखाई देता है , यह एक शानदार मंदिर है , इसके सामने है नौ ग्रहों का मंदिर । यहाँ एक नल लगा हुआ था  जिसमे ठंडा कूलर का पानी आ रहा था , मैंने पानी पिया थोड़ी राहत मिल गई ।

   यहीं से एक रास्ता ऊपर की तरफ जाता है भैरव नाथ मंदिर और टेडा मंदिर के लिए । शुरू मैं पथरीली सीढियां हैं और बाद में एक कच्चा रास्ता बना है  जो एक किमी दूर स्थित भैरवनाथ जी के मंदिर की ओर जाता है । मैं इसी रास्ते पर चलता जा रहा था , रास्ता एक दम सुनसान था , मुझे भैरव नाथ जी मंदिर तक कोई नहीं मिला और न दिखा, भैरव नाथ का मंदिर एक शानदार जगह में सबसे अलग बना है।

 यहाँ कुछ अपने लिए खाना बनाने में जुटे हुए थे । मैं कुछ पल यहाँ रुका और कूलर का ठंडा पानी पिया, अब आगे बढ़ने के लिए उर्जा पर्याप्त थी, यहाँ से आगे का रास्ता पहाड़ों से होकर गुजरता है, मोतीचूर के पत्थर की उबड़ खाबड़ सीडियां बनी हुई हैं और एकदम खड़ी चढ़ाई है ।

   रास्ता एक दम सुनसान था , मेरा अकेले चलने में मन नहीं लग रहा था इसलिए मैंने  मोबाइल का म्यूजिक प्लेयर चालु किया और गाना सुनने लगा। यहाँ पत्थरों पर जगह जगह टेडा मंदिर लिखकर  मंदिर की दिशा बताई गई है , मैं इन्ही के सहारे मंदिर की तरफ चलता ही जा रहा था । करीब एक घंटे के बाद मैं टेडा मंदिर में पहुँच गया। पहुंचते  ही पुजारी ने मुझे पहले नल का रास्ता बताया और कहा - जाओ , पहले पानी पीलो , नल उस तरफ है और फिर दर्शन कर लेना । मैंने ठीक ऐसा ही किया , मंदिर में ही एक प्रसाद की भी दुकान है ,प्रसाद लेकर मैं मंदिर में गया वहां पुजारी पहले से ही मेरी प्रतीक्षा में बैठा था।

    मैंने मंदिर में पहले दर्शन किये, यह प्रभु श्री राम का मंदिर है, यह मंदिर 1905 ई,.में आये भूकम्प के कारण  टेडा हो गया था । मंदिर के ठीक सामने है सीता जी की गुफा। जिसमे सीता जी की मूर्ति स्थापित है । कहा जाता है कि इस मंदिर की स्थापना पांडवों ने की थी । बाहर चाय और कोल्ड्रिंक की एक शर्माजी की दुकान है, मेरी शर्मा जी काफी मित्रता सी हो गई , मैं काफी देर उनके पास बैठा रहा और उन्होने मुझे इतने ऊँचे पहाड़ पर एक थम्प्सअप पिलाई । यहाँ से ठीक सामने और पहले वाले रास्ते से काफी आसान रास्ता जाता है, जो गोरखनाथ की डिब्बी पर पहुंचता है ।

मैं इसी रास्ते से वापस आया , और बहुत ही जल्द नीचे उतर गया ।



तारा रानी के मंदिर से ज्वालादेवी मंदिर का एक नजारा 


तारारानी के मंदिर में लगी मूर्तियाँ 








टेड़ा मंदिर जाने की लोकेशन 

नवग्रह मंदिर 

भैरव नाथ  जी का मंदिर 



श्री भैरव नाथ जी 

टेड़ा मंदिर की एक  और  लोकेशन 


काफी गर्मी थी , टी शर्ट पसीने से भीग चुकी  थी 

टेड़ा मंदिर जाने का  रास्ता 

टेड़ा मंदिर की आखिरी लोकेशन 

टेड़ा मंदिर से ज्वालादेवी का एक दृश्य 

सीताजी की गुफा और उनकी मूर्ति  


टेड़ा मंदिर , बरामदा बाद में  बना है इसलिए  सीधा है 

शर्माजी की चाय की दुकान 

वापसी के रास्ते में एक मंदिर 

टेड़ा मंदिर से लौटते हुए रास्ते में तारारानी  मंदिर का एक दृश्य 

गणेश जी की एक प्रतिमा 

एक और मंदिर 




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