Monday, October 23, 2017

BIMBISAR JAIL



बिम्बिसार की जेल तथा जीवक का दवाखाना

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सोनभंडार से एक रास्ता जरासंध की रणभूमि की तरफ भी गया है जो यहाँ से 2 किमी की दूरी पर है। ताँगे वाले बाबा मुझे यहाँ नहीं लेकर गए और इसे बिना देखे ही मैं आगे नई मंजिल की तरफ बढ़ चला। गया मोकामा रोड पर कुछ किमी चलने के बाद बिम्बिसार की जेल आती है। कहा जाता है कि यही वो स्थान है जहाँ अजातशत्रु ने अपने पिता बिम्बिसार को कैद करके रखा था। यह स्थान स्वयं बिम्बिसार ने चयन किया था क्योंकि बिम्बिसार की महात्मा बुद्ध के प्रति विशेष आस्था थी और जहाँ यह जेल बानी थी उसके ठीक पीछे गिद्धकूट पर्वत है जिसपर महात्माबुद्ध अपने अनुयायियों के साथ निवास करते थे।



इस जेल की खिड़कियों से राजा बिम्बिसार प्रतिदिन महात्मा बुद्ध के दर्शन करते थे और परम शांति का अनुभव करते थे। कहते हैं कि  अपने पिता का राज्य हड़पने के लिए अजातशत्रु ने राजा बिम्बिसार को जेल में कैद कर रखा था। अपनी माँ से अपने पिता के प्रति स्नेह के कुछ शब्द सुनाने के बाद उसमे पिता के प्रति दया और सहानभूति ने जन्म लिया और वो अपने हाथ में कुल्हाड़ी लेकर अपने पिता के बेड़ियाँ काटने के लिए निकल पड़ा।  हाथ में कुल्हाड़ी लाते देख बिम्बिसार ने सोचा की मेरा पुत्र अत्यंत ही निर्दयी है और वह मुझे मारने के इरादे से कुल्हाड़ी लेकर आ रहा है, उन्होंने अपनी अंगूठी में जड़े हुए विष का सेवह कर बिस्तर पर ही अपनी  जीवन लीला समाप्त कर ली।

विश्व शांति स्तूप की तरफ चलने पर बाईं तरफ एक प्राचीन स्मारक के अवशेष देखने को मिलते हैं। यह जीवक का दवाखाना कहलाता है, बिम्बिसार के शासनकाल के  दौरान जीवक एक महान चिकित्सक थे जिन्होंने महात्मा बुद्ध का उपचार किया था। जीवक का नाम मगध के राजवैध के रूप में भारतीय इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में निर्मित है।


बिम्बिसार कारागार 

कारागार की दीवारें 

बिम्बिसार की जेल 

बिम्बिसार की जेल 

बिम्बिसार का कारागार 

बिम्बिसार की जेल 


जीवक का दवाखाना 

जीवक का दवाखाना 
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