Monday, October 23, 2017

AJATSHATRU FORT


अजातशत्रु का किला 

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राजगीर रेलवे स्टेशन से बाहर निकलकर मैं राजगीर शहर में आया, सुबह सुबह ही पैदल अजातशत्रु के किले तक पहुंच गया । यह किला, गया - मोकामा राजमार्ग 82 पर स्थित है। यह किला पूर्ण रूप से ध्वस्त हो चुका है अब केवल इसकी बाहरी दीवारों के अवशेष ही शेष हैं, किले के अंदर जहाँ किसी ज़माने में राज महल हुआ करते थे उस जगह अब केवल वर्तमान में मैदान ही बचे हैं किसी भी राजमहल के अवशेष अब यहाँ देखने को नहीं मिलते हैं। किले के रूप में इसकी चारदीवारी ही शेष बची है जो इसके किसी समय में विशालकाय होने का संकेत देती है।


मैंने इस किले को पूर्ण रूप से देखा, मुझे ऐसा एहसास हुआ कि हो न हो इस किले के खंडहर आज भी जमीन के नीचे जरूर होंगे, पुरातत्व विभाग अगर इसकी खुदाई करता है तो इस किले के मैदान के नीचे अवश्य और भी ऐतिहासिक धरोहर निकलने की संभावना है। आज इस किले में केवल खेल का मैदान है। मैं आज उस किले के अंदर खड़ा था जहाँ कभी मगध के विशाल साम्राज्य की राजधानी हुआ करती थी, जरासंध, बिम्बिसार और अजातशत्रु का यह किला अपने अंदर इतिहास की हजारों यादों को समेटे हुए वक़्त के ढेरे के साथ ढह चुका है।

किले से थोड़ा आगे बढ़ने पर अजातशत्रु का स्तूप मौजूद है , पांच छः पिलरों के साथ बना यह स्तूप अजातशत्रु का स्तूप कहलाता है जो गिद्धकूट पर्वत के समीप स्थित है यहाँ से एक रास्ता राजगीर सिटी के लिए भी जाता है। राजगीर सिटी ही मगध की प्राचीन राजधानी गिरिवज्र अथवा राजगृह थी। यहाँ एक नौलखा मंदिर स्थित है जिसे मैंने देखा तो था परन्तु बैटरी न होने कारण मैं इसके फोटोग्राफ नहीं ले पाया था।

AJATSHATRU FORT

AJATSHATRU FORT

AJATSHATRU FORT, RAJGIR

WALL OF AJATSHATRU FORT, RAJGIR

AJATSHATRU FORT, RAJGIR


AJATSHATRU STUP
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