Saturday, June 22, 2013

CHINTPURANI DEVI




माँ छिन्नमस्तिका धाम

सुबह करीब दस बजे हम चिंतपूर्णी  पहुँच गए, यहाँ चिंतपूर्णी देवी का मंदिर है जिसे छिन्मस्तिका धाम भी कहते हैं, यह ज्वालादेवी से करीब अड़तीस किमी दूर है। बस स्टैंड से उतर कर मंदिर जाने के लिए एक सीधी पक्की सड़क बनी है, मैं यहाँ पहली बार आया हूँ, यहाँ काफी बड़ा बाजार भी है और भक्तों की संख्या मुझे यहाँ सबसे अधिक दिखाई दे रही थी। यहाँ आते ही हमें एक जगह लंगर चलता हुआ मिला, पूड़ी सब्जी के साथ साथ खीर भी थी। हमने सबसे पहले माँ का यह प्रसाद ग्रहण किया और चल दिए देवी माँ के मंदिर की ओर , यहाँ भी मंजू ने लंगर खाने से इनकार कर दिया, न जाने क्यूँ उसे देवी माँ के इस प्रसाद से भी एलर्जी थी।

 देवी माँ का प्रसाद भाग्यशाली लोगों के ही नसीब में होता है, कुछ समय के लिए हम सब भाग्य शाली थे , केवल मंजू को छोड़कर। थोडा आगे लंगर के रूप में कोकाकोला और पेप्सी का मुफ्त वितरण चल रहा था, मैंने चार गिलास आराम से खाली कर दिए। अब हम पहुंचे सेंटर पॉइंट पर, यहाँ से मंदिर जाने के लिए दो अलग अलग लाइन लगी हुई थी, हम भी लग गए एक लाइन में, पर मुझे नहीं पता था यह इतनी लम्बी लाइन होगी।

 भक्तो की अधिकतम संख्या को देखते हुए यहाँ भी के पर्ची का सिस्टम है, जिसपर पर्ची होगी वही मंदिर में प्रवेश कर सकता है अन्यथा शुरू से लाइन में लगना पड़ता है। हम यथावत लाइन में लगे रहे सो हमें पर्ची आराम से मिल गई।

देवी माँ का मंदिर एक बरगद के वृक्ष के नीचे बना हुआ है , मंदिर के चारों तरफ सोने का आवरण लगा हुआ है , यहाँ देवी के भक्तों की ही सप्रेम भेंट है।कहा  जाता है की यहाँ सती के चरण गिरे थे और यह धाम चिंतपूर्णी कहलाया, यहाँ सच्चे श्रद्धा भाव से आने वाले हर इंसान की चिंता का निवारण हो जाता है इसलिए यह धाम चिंतपूर्णी कहलाता है, मतलब चिंता पूरी करने वाली ।

 माँ के दर्शन करने के बाद हम कुछ देर मंदिर के प्रांगण में बने हॉल में आराम किया और फिर चल दिए होशियारपुर स्टेशन की तरफ।

चिन्तपुरनी देवी में भक्तों का टोला 

चिंतपूर्णी बाजार 
 लंगर भवन 


मंदिर की लगी लाइन 

चिंतपूर्णी मंदिर प्रांगण 


चिंतपूर्णी देवी मंदिर 


चिन्तपुरनी 


मंदिर का प्रवेश द्वार 




माँ चिंतपूर्णी
माँ चिंतपूर्णी  देवी 

छिन्नमस्तिका देवी 
मंदिर के प्रांगण में बने हॉल में विश्राम 

जय माता दी 

भारतीय स्टेट बैंक चिंतपूर्णी


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